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सांचौर-श्री प्रताप फाउंडेशन ने सांचौर एसडीएम को मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा है। इसमें पंचायती राज चुनावों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को 10 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग की गई है।
EWS को पंचायत चुनावों में आरक्षण देने की मांग
ज्ञापन में बताया गया कि भारत के संविधान के 73वें संशोधन के तहत राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 15 (क), (ख) और (ग) के अनुसार एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग को पंचायती राज चुनावों में आरक्षण प्राप्त है। इसके अतिरिक्त, संविधान के 103वें संशोधन के माध्यम से केंद्र सरकार ने EWS वर्ग को सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में 10 प्रतिशत आरक्षण दिया है, जो राजस्थान में भी लागू है।
फाउंडेशन ने अपने ज्ञापन में दावा किया है कि प्रदेश की 352 पंचायत समितियों में से 105 में अनारक्षित वर्ग का प्रतिनिधित्व 10 प्रतिशत से भी कम है। 32 पंचायत समितियों में अनारक्षित वर्ग का कोई सदस्य नहीं है, जबकि 50 में केवल एक सदस्य है।
इसी तरह, 33 जिला परिषदों में से 8 में अनारक्षित वर्ग का प्रतिनिधित्व 10 प्रतिशत से कम है। डूंगरपुर में शून्य तथा दौसा और करौली में केवल एक-एक जिला परिषद सदस्य अनारक्षित वर्ग से हैं।ज्ञापन में कहा गया है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के पास चुनाव लड़ने के लिए पर्याप्त संसाधनों की कमी के कारण उनकी राजनीतिक भागीदारी लगातार घट रही है। सामाजिक न्याय के सिद्धांत का हवाला देते हुए फाउंडेशन ने मांग की है कि एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग की तरह EWS वर्ग को भी पंचायती राज संस्थाओं में 10 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए।
ये रहे मौजूद
फाउंडेशन ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि 2026 में प्रस्तावित त्रिस्तरीय पंचायती राज चुनावों से पहले अधिनियम में संशोधन किया जाए। इसका उद्देश्य EWS वर्ग को आरक्षण का प्रावधान सुनिश्चित करना है, ताकि उन्हें समान अवसर मिल सकें। इस दौरान हिन्दू सिंह दूठवा, समस्त व्यापार मंडल अध्यक्ष हरीश पुरोहित सीलू, गजेंद्र सिंह करोला, डूंगर सिंह और देवेंद्र सिंह सहित कई अन्य लोग उपस्थित रहे।

