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खीमाराम मेवाडा
तखतगढ़ में बढ़ता अतिक्रमण बन रहा जनजीवन के लिए खतरा
प्रशासन की निष्क्रियता पर उठ रहे सवाल
तखतगढ़ 21 फरवरी (खीमाराम मेवाडा) कस्बे में पिछले कुछ वर्षों से अतिक्रमण की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है और अब यह जनजीवन, यातायात व्यवस्था तथा सार्वजनिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है। सरकारी भूमि, आम रास्तों, नालों और मुख्य सड़कों पर हो रहे अवैध कब्जों ने कस्बे की व्यवस्था को अस्त-व्यस्त कर दिया है। लेकिन नगरपालिका प्रशासन किसी प्रकार का ध्यान देने को तैयार नहीं है।
मुख्य मार्गों पर बढ़ा दबाव
मुख्य चौराहे से ग्राम सहकारी समिति और नहेरू रोड तिराया तक सड़क किनारे लगाए गए केबिन, हाथ-ठेले, अस्थायी दुकानें और टीन शेड जैसे ढाँचों ने सड़क को अत्यंत संकरा बना दिया है। जहां पहले दो बड़े वाहन आसानी से निकल जाते थे, वहां अब एक वाहन का निकलना भी मुश्किल हो गया है। इससे प्रतिदिन जाम की स्थिति बनती है और राहगीरों को जान जोखिम में डालकर चलना पड़ता है।
सरकारी भूमि पर स्थायी कब्जों के आरोप
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि कई स्थानों पर सरकारी भूमि पर स्थायी निर्माण कर किराया वसूला जा रहा है। यदि यह सत्य है, तो यह न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि सरकारी संपत्ति की खुली लूट भी कह सकते है। लोगों का कहना है कि प्रशासन की अनदेखी के कारण ऐसे कब्जाधारियों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं।
दुर्घटनाओं का बढ़ता खतरा
पुराना बस स्टैंड पर तो चारों तरफ नया खेड़ा गोगरा पादरली हिंगोला राजपुरा कोसेलाव टैक्सी स्टैंड ने घेर रखा है। जहा संकीर्ण सड़कों के कारण मुख्य बाजार से गुजरते वाहन चालकों को अचानक ब्रेक लगाने पड़ते हैं, जिससे टक्कर और सड़क दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है। विशेष रूप से स्कूली बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति अत्यंत खतरनाक है। साथ ही नेशनल हाइवे 325 और नहेरू रोड तिराया तक तो पुरी तरह अतिक्रमियो की भेट चढ चुका है। मुख्य चौराह के दोनो ओर चाय की थडियो और अल्पाहार के ठेलो वालो का हाइवे पर इस कदर अतिक्रमण बढ गया है। कि कभी भी बडा हादसा हो सकता है।
आपातकालीन सेवाओं में बाधा
एम्बुलेंस, दमकल और पुलिस वाहनों को जाम और संकरे रास्तों के कारण समय पर घटनास्थल तक पहुंचने में कठिनाई होती है। आपात स्थिति में कुछ मिनटों की देरी भी जानलेवा साबित हो सकती है।
व्यापारिक गतिविधियों पर प्रभाव
अव्यवस्थित अतिक्रमण से नियमित दुकानदारों का व्यापार प्रभावित हो रहा है। ग्राहक जाम और अव्यवस्था के कारण बाजार आने से कतराने लगे हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ रहा है।
स्वच्छता और जल निकासी व्यवस्था पर असर
नालों और रास्तों पर कब्जों के कारण सफाई कार्य बाधित हो रहा है। जल निकासी प्रभावित होने से बरसात में जलभराव की समस्या उत्पन्न हो सकती है, जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ता है।
कानून व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न
जब खुलेआम अवैध कब्जे होते हैं और कार्रवाई नहीं होती, तो आमजन का प्रशासन पर भरोसा कमजोर होता है। इससे कानून व्यवस्था की छवि पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
नागरिकों में बढ़ता आक्रोश
कस्बेवासियों का कहना है कि कई बार मौखिक शिकायतों के बावजूद पालिका प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। लोगों में यह धारणा बनती जा रही है कि या तो प्रशासन उदासीन है या फिर प्रभावशाली लोगों के दबाव में कार्यवाही से बच रहा है।

