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खीमाराम मेवाडा
तखतगढ़-वर्ष 2018 में हाईवे निर्माण के बाद 2023 में बिपरजॉय के जख्म अभी भूले नहीं है, नगरवासी, तखतगढ़ पालिका क्षेत्र में विकास या लापरवाही? करोड़ों की परियोजनाएँ जवाबदेही की प्रतीक्षा में
तखतगढ 18 फरवरी (खीमाराम मेवाडा) तखतगढ़ नगर के दो क्षेत्र में आने वाली आमजनता वर्ष 2018 में एनएच 325 हाईवे निर्माण के बाद 2023 में एक ही महीने में दो बार बिपरजॉय के जख्मो को अभी भूली नहीं है। लेकिन वर्तमान मे तखतगढ कस्बे में चल रहे करोड़ों रुपये के विकास कार्य कस्बे के भविष्य को संवारने का अवसर भी हैं। और प्रशासनिक जवाबदेही की प्रतीक्षा मै भी देखी जा सकती है। की राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत तालाब सौंदर्यकरण तथा मुख्य चौराहे से लेकर मैन सड़क निर्माण जैसी परियोजनाएँ कागज़ों में विकास का प्रतीक अवश्य लगती हैं।
लेकिन जमीनी हकीकत कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। आम जनता का आरोप है कि लगभग 12 करोड़ 34 लाख रुपये की लागत से बनने वाला मुख्य मार्ग तथा 12 करोड़ का ही तालाब सौंदर्यकरण और गार्डन कार्य बिना प्रभावी तकनीकी निगरानी के संचालित हो रहे हैं। यदि यह सत्य है। तो यह केवल प्रक्रियात्मक चूक नहीं बल्कि सार्वजनिक धन के उपयोग में गंभीर लापरवाही का संकेत भी है। किसी भी निर्माण कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमित साइट निरीक्षण, सामग्री परीक्षण, डिजाइन मानकों का पालन और कार्य प्रगति की पारदर्शिता अनिवार्य होती है।
इन प्रक्रियाओं की अनुपस्थिति भविष्य में सड़क धंसने, जलभराव, संरचनात्मक क्षति और अतिरिक्त मरम्मत खर्च का कारण बन सकती है। तालाब सौंदर्यकरण जैसे कार्यों में तो तकनीकी सावधानी और भी आवश्यक है। क्योंकि यह केवल सौंदर्य से जुड़ा विषय नहीं बल्कि जल प्रबंधन, भूजल पुनर्भरण और शहरी बाढ़ नियंत्रण से सीधे जुड़ा होता है। यदि जल आवक मार्ग अवरुद्ध हुए या जलधारण क्षमता कम हुई, तो आने वाले वर्षों में जलभराव और जल संकट दोनों की आशंका बढ़ सकती है। विकास का वास्तविक अर्थ केवल बजट घोषणाएँ, शिलान्यास या निर्माण की औपचारिक शुरुआत नहीं है।विकास तब सार्थक होता है। जब निर्माण टिकाऊ हो, पारदर्शिता बनी रहे और जनता को उसका दीर्घकालिक लाभ मिले। अन्यथा करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद जनता को समस्याएँ ही विरासत में मिलने वाली हैं। यह भी आवश्यक है। कि संबंधित विभाग तत्काल तकनीकी निरीक्षण सुनिश्चित करें, गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक करें और कार्य प्रगति की जानकारी नागरिकों के लिए उपलब्ध कराएँ। साथ ही, जनप्रतिनिधियों और नागरिक समितियों को निगरानी प्रक्रिया में शामिल करना पारदर्शिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
अनयथा वर्ष 2018 में एनएच 325 हाईवे निर्माण के दौरान सांडेराव से लेकर तखतगढ़ चौराहे तक किस तरह वर्षाजल का जल भराव होगा और किसके लिए आफत बनेगा जिसकी किसी भी जन्मप्रतिनिधि या तकनीकी अधिकारी द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया। अगर ध्यान भी दिया तो कुछ स्थानीय लोगों ने दिल्ली पहुंचकर मुख्य चौराहे पर प्रस्तावित अप्लाई ओवर को ही निरस्त करवा बैठे जब
2023 में 18 जून से 10 जुलाई एक ही महीने में दो बार बिपरजॉय चक्रवर्ती तूफान का दंश डूब क्षेत्र की जनता ने भुगता है। उनको जाकर पूछिए वो इन जख्मो को अभी भूले नहीं है। हालाकि तखतगढ़ के नागरिक विकास के विरोधी नहीं हैं; बल की केवल चाहते हैं कि विकास टिकाऊ हो, ईमानदार हो और आने वाली पीढ़ियों के लिए उपयोगी साबित हो। अब यह प्रशासन पर निर्भर है कि वह इन परियोजनाओं को जनविश्वास की मिसाल बनाता है या लापरवाही का प्रतीक।


