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बेडा उपखण्ड में फ्लोराइड से मुक्त लोगो को मुक्त करने के लिए डॉक्टर बिमल शाह दम्पति ने अब तक 92 आरओ संयंत्रों को लगाकर हजारों बच्चों जीवनदायी शुद पेयजल पिलाने हेतु जगह जंगल निःशुल्क आरओ प्लांट लगवा रहे, यह कार्य चिकित्सक दम्पति का निरंतर जारी है।
पश्चिमी राजस्थान में पेयजल में फ्लोराइड और अत्यधिक टीडीएस (TDS) की समस्या वर्षों से लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रही है। इसका सबसे अधिक और शीघ्र प्रभाव बच्चों पर देखने को मिल रहा है। इसी चुनौती को देखते हुए क्षेत्र में एक अनुकरणीय सामाजिक पहल के तहत बाली सुमेरपूर शिवगज तहसील क्षेत्रों में 92 आरओ (शुद्ध पेयजल) संयंत्र स्थापित किए गए हैं, जिससे हजारों बच्चों और ग्रामीणों को सुरक्षित व स्वच्छ पानी उपलब्ध हो रहा है।
चिकित्सकीय अनुभव से जन्मी सेवा की पहल
इस अभियान की शुरुआत प्रसिद्ध फिजीशियन डॉ. बिमल शाह ने की। लंबे चिकित्सकीय अनुभव के दौरान उन्होंने महसूस किया कि क्षेत्र में किडनी रोग, पेट की बीमारियां और एनीमिया के मामलों में निरंतर बढ़ोतरी हो रही है, जिसका प्रमुख कारण अशुद्ध पेयजल है।
इस सेवा कार्य में उन्हें अपनी पत्नी डॉ. तृप्ति शाह का भी विशेष सहयोग मिला।
इस सामाजिक मुहिम की शुरुआत खेजरिया गांव, तहसील से हुई, जहां पहला आरओ प्लांट स्थापित किया गया।
तीन तहसीलों में 92 आरओ संयंत्र
वर्तमान में कुल 92 आरओ संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं, जिनका विवरण इस प्रकार है—
बाली तहसील: 40 संयंत्र
सुमेरपुर तहसील: 30 संयंत्र
शिवगंज तहसील: 15 संयंत्र
अन्य स्थान: 10 संयंत्र (विवरण प्रतीक्षित)
हर आरओ प्लांट की अनुमानित लागत लगभग 75 हजार रुपये है।
विद्यालय परिसरों में ही क्यों लगाए जा रहे हैं संयंत्र?
डॉ.बिमल शाह का मानना है कि आज भी 60 से 70 प्रतिशत बच्चे हीमोग्लोबिन की कमी से जूझ रहे हैं। इसलिए अधिकांश आरओ प्लांट विद्यालय परिसरों में ही लगाए गए हैं, ताकि बच्चों को नियमित रूप से शुद्ध पेयजल मिल सके और एनीमिया जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव हो।
संस्थाओं का भी मिला सहयोग
शुरुआत में डॉ. शाह ने स्वयं के स्तर पर आरओ संयंत्र लगवाए, बाद में मित्रों और पारिवारिक सदस्यों को अभियान से जोड़ा। अब तक 25 आरओ प्लांट पारिवारिक मित्रों के सहयोग से लगे। इसके अलावा एमटीपीआई फाउंडेशन, रोटरी क्लब ऑफ बॉम्बे और आयन एक्सचेंज जैसी संस्थाओं ने भी इस अभियान में अहम योगदान दिया।
सबसे पहले पानी की अधिक आवश्यकता वाले क्षेत्र को चिन्हित किया जाता है
संस्था की टीम द्वारा पानी की स्वयं जांच की जाती है
क्षेत्र में अधिकांश जगह ट्यूबवेल और कुओं का पानी है
कई स्थानों पर TDS 800 से 1000 तक, तो कहीं-कहीं 2000 तक पाया गया
ऐसे गांव, जहां मजबूरी में लोग यह पानी पी रहे हैं, उन्हें प्राथमिकता दी जाती है
जांच रिपोर्ट और फंड उपलब्धता के आधार पर आरओ प्लांट स्वीकृत किया जाता है
आगे की योजना: हीमोग्लोबिन जांच अभियान
डॉ. शाह का अगला लक्ष्य विद्यालयों में बच्चों की हीमोग्लोबिन जांच कर आवश्यकता अनुसार दवाइयां उपलब्ध कराना है। इसके लिए वे सरकार और प्रशासन से अनुमति की मांग कर रहे हैं, ताकि सभी कार्य सरकारी दिशा-निर्देशों के अंतर्गत किए जा सकें।
सेवा भावना की मिसाल
मुंबई में लंबे समय तक सेवाएं दे चुके डॉ. बिमल शाह की दोनों बेटियां वर्तमान में यूएसए और यूके में सेटल हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपने मूल क्षेत्र के लिए समर्पित होकर कार्यकर रहें है

