PALI SIROHI ONLINE
उदयपुर-उदयपुर में महाशिवरात्रि से एक दिन पहले शनिवार को शहर की सड़कों पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। शिव दल मेवाड़ की ओर से आयोजित 46वीं विशाल शिव यात्रा ने पूरे शहर को शिवमय कर दिया। टाउन हॉल से शुरू हुई इस यात्रा में हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए, जो महादेव के जयकारों के साथ आगे बढ़ रहे थे।
शिव दल के संरक्षक मनीष मेहता ने बताया कि संगठन की ओर से निकाली जाने वाली इस शिव यात्रा का यह 46वां साल है। यात्रा की शुरुआत से पहले टाउन हॉल परिसर में विधि-विधान से महाआरती की गई। इसके बाद यात्रा शहर के विभिन्न मुख्य मार्गों के लिए रवाना हुई। इस बार की यात्रा बेहद खास रही क्योंकि इसमें सुरक्षा और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला।
सजीं 12 ज्योतिर्लिंगों की झांकियां
यात्रा का मुख्य आकर्षण सुसज्जित गाड़ियों पर विराजित 12 ज्योतिर्लिंग थे। शहरवासियों ने कतारबद्ध होकर इन ज्योतिर्लिंगों के दर्शन किए और पुण्य लाभ कमाया। यात्रा में शामिल शिव भक्त भजनों की धुन पर जमकर थिरकते नजर आए। इसके साथ ही कई आकर्षक झांकियां भी सजाई गई थीं, जो भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों को दर्शा रही थीं।
351 फीट का तिरंगा और अखाड़ा प्रदर्शन
भक्ति के साथ-साथ देशभक्ति का नजारा भी इस यात्रा में देखने को मिला। शोभायात्रा में 351 फीट लंबा विशाल तिरंगा शामिल किया गया, जिसे थामे युवा गर्व के साथ चल रहे थे। वहीं, दूसरी ओर अखाड़ों के कलाकारों ने अपने हैरतअंगेज शस्त्र प्रदर्शन से सबका दिल जीत लिया। युवाओं ने पारंपरिक हथियारों के साथ शौर्य का प्रदर्शन किया, जिसे देखने के लिए सड़कों के दोनों ओर लोगों की भारी भीड़ जमा रही।
केसरिया पगड़ी में नजर आए 1000 कार्यकर्ता
शिव दल मेवाड़ के 1000 से अधिक कार्यकर्ता इस दौरान खास ड्रेस कोड में दिखे। सभी कार्यकर्ताओं ने सिर पर केसरिया पगड़ी बांधी हुई थी, जो एकता और सेवा का संदेश दे रही थी। यात्रा में बड़ी संख्या में साधु-संतों ने भी शिरकत की। संतों की मौजूदगी ने वातावरण को और भी आध्यात्मिक बना दिया। टाउन हॉल से शुरू होकर यह यात्रा शहर के पुराने और नए हिस्सों के प्रमुख चौराहों से गुजरी, जहां जगह-जगह पुष्प वर्षा कर भक्तों का स्वागत किया गया।
वही, कल महाशिवरात्रि पर सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ दुर्लभचतुर्ग्रही योग का विशेष संयोग बन रहा है, जिससे पर्व का महत्व और बढ़ गया है। ज्योतिषाचार्य पंडित सुनील त्रिपाठी ने बताया कि ज्योतिषीय गणना के अनुसार सूर्य, शुक्र, बुध एवं, राहु ग्रह कुंभ राशि में स्थित रहेंगे, जो इस पर्व को अत्यंत शुभ एवं फलदायी बना रहे हैं। इस वर्ष महाशिवरात्रि उत्तराषाढ़ा एवं श्रवण नक्षत्र के संयोग में मनाई जाएगी।
उन्होंने बताया कि शिव पुराण के अनुसार महाशिवरात्रि भगवान शिव की अत्यंत प्रियरात्रि मानी गई है। इस दिन रुद्राभिषेक, शिवार्चन, बेलपत्र अर्पण, मंत्र जाप एवं रात्रि जागरण का विशेष महत्व है। रात्रि के चारों प्रहर में विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करने से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति संभावना होती है। त्रिपाठी ने कहा कि ज्योतिष शास्त्र में चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान शिव माने गए हैं, इसलिए इस दिन किया गया शिव पूजन विशेष फल प्रदान करता है।
