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सिरोही-सांसद नीरज डांगी ने शुक्रवार को राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान मीडियाकर्मियों से जुड़े एक मुद्दे की ओर सदन का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने पत्रकारों को भारतीय रेल की ओर से दी जाने वाली यात्रा रियायतों को पुनः बहाल करने की मांग की।
सांसद डांगी ने बताया कि कोविड-19 महामारी से पहले मीडियाकर्मियों को भारतीय रेल यात्रा रियायतें प्रदान करती थी। महामारी के दौरान इन रियायतों को अस्थायी रूप सेस्थगित कर दिया गया था। हालांकि देश में सामान्य स्थिति बहाल होने, सभी आर्थिक व सामाजिक गतिविधियां सुचारु रूप से प्रारंभ होने और अन्य श्रेणियों को दी गई रियायतें पुनः लागू होने के बावजूद, पत्रकारों की यह महत्वपूर्ण सुविधा आज तक बहाल नहीं की गई है।
डांगी ने जोर देकर कहा कि रेलवे की ओर से दी जाने वाली यात्रा रियायतें किसी प्रकार का विशेषाधिकार नहीं, बल्कि मीडियाकर्मियों के कर्तव्यों के निर्वहन में सहायक एक आवश्यक सुविधा रही हैं। लोकतंत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित तभी सुनिश्चित हो सकता है जब पत्रकार निर्भय, स्वतंत्र और सुलभ साधनों के साथ कार्य कर सकें।
‘रियायतों से वंचित रखना कार्यक्षमता को सीमित करता है’
सांसद नीरज डांगी ने यह भी बताया कि पत्रकारों को यात्रा रियायतों से वंचित रखना अप्रत्यक्ष रूप से उनकी कार्यक्षमता को सीमित करता है। यह स्थिति लोकतांत्रिक मूल्यों की भावना के अनुरूप नहीं कही जा सकती। विशेष रूप से छोटे एवं स्वतंत्र पत्रकार, साथ ही ग्रामीण एवं क्षेत्रीय मीडिया से जुड़े संवाददाता इस निर्णय से सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं।
रियायतों को बहाल करने की मांग
सांसद नीरज डांगी ने सरकार से मांग की है कि कोविड-19 महामारी से पहले भारतीय रेल की ओर से पत्रकारों को प्रदान की जा रही सभी यात्रा रियायतों को तत्काल प्रभाव से पुनः बहाल किया जाए।मान्यता प्राप्त पत्रकारों के लिए एक स्पष्ट, पारदर्शी एवं स्थायी नीति का निर्माण किया जाए, जिससे भविष्य में किसी भी आपात स्थिति में उनके अधिकारों एवं सुविधाओं की अनावश्यक समाप्ति ना हो। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि इस नीति का लाभ वास्तविक एवं सक्रिय पत्रकारों तक सरल प्रक्रिया के माध्यम से पहुंचे।

