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सिरोही-मीरपुर जहाज मंदिर का ध्वजारोहण 14 फरवरी को होगा
सिरोही। देवाल्यों की भूमि सिरोही में सिरोही-मंडार-काण्डला हाईवे मार्ग पर सिरोही से 15 किमी. दुरी पर 9 वीं शताब्दी में निर्मित ’’ हमीरपुर जैन मंदिर ’’ के पहले एक नूतन जहाज मंदिर बना हैं। जहाजरूपी आकार में भगवान मुनिसुव्रतस्वामी, श्री बंटुक भेरव शक्तिपीठ एवं युगप्रधान दादा साहेब श्री पाश्र्वचंद्रसूरीश्वरजी महाराजा का स्मृति मंदिर बना हैं जिसकी दुसरी वर्षगांठ 14 फरवरी 2026 को हैं। मीरपुर श्री पाश्र्वचंद्रसूरीश्वरजी महाराजा की जन्म भूमि है।
प्रवर्तक श्री पाश्र्वयशचन्द्र म. सा., मुनिराज पुण्यरत्नचन्द्रजी एवं नयशेखरचन्द्रजी म सा एवं प्रर्वतनी साध्वी श्री पुण्यरेखाश्रीजी म. सा. की प्रशिष्या साध्वी हितरेखाश्रीजी एवं स्नेहलरेखाश्रीजी, हेमलरेखाश्रीजी म. सा. की निश्रा में दो दिवसीय ध्वजारोहण का कार्यक्रम आयोजित किया गया है। 13 फरवरी को सुबह 18 अभिषेक, दोपहर में दादागुरूदेव पूजा एवं रात्रि में भक्ति भावना होेगी। 14 फरवरी को सतरभेदी पूजा एवं विधि विधान के साथ ध्वजारोहण होगा।
विधिकारक, चिराग भाई, डीसा एवं संगीतज्ञ कमलचंदजी बांठिया, नागौर इस अवसर पर विधि विधान एवं भक्ति भावना करायेगे।
तीर्थ निर्माता एवं संस्थापक परिवार के प्रमुख विजयराज चैधरी ने बताया कि ध्वजारोहण पर देश भर से भक्तगण आयेगें। इस तीर्थ में धर्मशाला एवं भोजनशाला की भी सुविधा उपलब्ध हैं। यह तीर्थ पावापुरी तीर्थ से पहले मुख्य सडक के समीप स्थित हैं।
जहाज मंदिर के आगे 9 वीं शताब्दी में निर्मित ’’ भीड भंजन पाश्र्वनाथ भगवान ’’ का प्राचीन मंदिर है जहां की शिल्पकला बहुत ही प्राचीन एवं आकृर्षक हैं। इस गांव का नाम पहले हमीरपुर था जो बाद में अभ्रंश होकर ’’ मीरपुर ’’ बन गया। अब यहां पर नया उपासरा, भोजनशाला एवं धर्मशाला का नव निर्माण का कार्य चल रहा हैं।
ध्वजा जैन शासन की गौरवमय पहचान है: मुनिराज नयशेखरचन्द्र तीर्थ के ट्रस्टी पी. सी. जैन ने बताया कि जहाज मंदिर 7 बीघा भूमि पर फैला हुआ हैं ओर 6588 वर्गफीट में नवग्रह युक्त जहाज मंदिर बना हुआ हैं। इस तीर्थ की प्रेरणा साध्वी सुनंदिताश्रीजी ने दी ओर उनके सानिध्य में यह तीर्थ बना हैं। मुनिराज नयशेखरचन्द्र ने ध्वजारोहण के बारे में बताया कि मंदिर की ध्वजा मात्र कपडा नही है यह जैन शासन की गौरवमय पहचान एवं आध्यात्मिक जागृति का प्रतीक है, जो हमेशा मंदिर के शिखर पर फहराती हैं। यह ध्वजा बताती है कि यह परमात्मा का शासन सर्वोच्च है ओर यह संदेश देती है कि अंहिसा सत्य अपरिग्रह एवं संयम के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं। यह ध्वजा यह भी संदेश देती हैं कि मानव जीवन सतत आत्मशुद्धि सत्य एवं सुख का मार्ग है।

