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खीमाराम मेवाडा
बजट में तखतगढ़ की अनदेखी, उम्मीदों का टूटा भरोसा
न बाईपास का तोफा ना ही पानी निकासी की व्यवस्था बजट के बाद जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही
तखतगढ 12 फरवरी (खीमाराम मेवाडा ) राजस्थान विधानसभा में पेश हुए बजट को सरकार भले ही “विकसित राजस्थान 2047” की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही हो, लेकिन सुमेरपुर उपखंड एव तखतगढ़ कस्बे के लिए यह बजट निराशा और उपेक्षा का दस्तावेज बनकर रह गया है। मंगलवार को जब वित्त मंत्री दिया कुमारी सदन में बजट भाषण पढ़ रही थीं, तब तखतगढ़ के लोग टीवी स्क्रीन पर टकटकी लगाए बैठे थे। उम्मीद थी कि वर्षों से लंबित दो प्रमुख मांगें यह थी की वषॅ 2023 के 10 जुन और 18 जुलाई दो बार बिपरजॉय का दंश झेलचूकी जनता को राहत देने के लिए स्थायी जल निकासी व्यवस्था और बाईपास सड़क निर्माण—पर कोई ठोस घोषणा होगी। लेकिन पूरा बजट भाषण समाप्त हो गया और तखतगढ़ का नाम तक नहीं आया।
जिस पर भाजपा समथॅको एव नगरवासीयो का कहना है कि यह केवल योजनाओं की अनदेखी नहीं, बल्कि कस्बे की भावनाओं की भी उपेक्षा है। बरसात के दिनों में तखतगढ़ हर साल बाढ़ जैसी स्थिति झेलता है। मुख्य बाजार से लेकर रिहायशी इलाकों तक जलभराव आम बात है। व्यापार ठप हो जाता है। स्कूल जाने वाले बच्चे परेशान होते हैं। साथ ही आमजन को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इसके बावजूद अब तक जल निकासी की स्थायी योजना के लिए बजट में कोई प्रावधान नहीं किया गया।
दूसरी ओर, बढ़ती आबादी और शहरी विस्तार के कारण कस्बे में यातायात का दबाव लगातार बढ़ रहा है। संकरी सड़कों और बाजार क्षेत्र में दिनभर जाम की स्थिति रहती है। लंबे समय से बाईपास सड़क की मांग की जा रही है। ताकि भारी वाहनों को कस्बे के बाहर से निकाला जा सके। स्थानीय भाजपा नेताओं ने भी आश्वासन दिया था। कि इन दोनों मांगों को कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत तक पहुंचाया गया है। और इस बार बजट में समाधान होगा। लेकिन बजट के बाद जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है।
राजनीतिक रूप से भी यह सवाल उठ रहा है कि जब क्षेत्र से भाजपा का प्रतिनिधित्व मजबूत है।, फिर भी तखतगढ़ को लगातार नजरअंदाज क्यों किया जा रहा है।जबकी पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भाजपा का विधायक होते हुए भी कभी निराश नही किया और समय-समय पर क्षेत्र को कुछ न कुछ घोषणाएं मिलती रही थीं, लेकिन पिछले दो वर्षों में डबल इंजन की सरकार द्वारा तखतगढ़ के हिस्से में मात्र खाली झोली ही मिली है।
व्यक्ति गत जानकारी देते हुए कस्बेवासियों का कहना है कि “2047 का सपना दिखाने से पहले 2026 की समस्याओं का समाधान जरूरी है।” यदि बुनियादी सुविधाओं—जल निकासी और यातायात प्रबंधन—पर ही ध्यान नहीं दिया तो विकास के बड़े-बड़े दावे खोखले साबित होंगे। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार आगामी दिनों में विशेष पैकेज या विभागीय स्वीकृतियों के माध्यम से तखतगढ़ की इन प्रमुख मांगों को पूरा करेगी, या फिर यह कस्बा यूं ही बजट की पंक्तियों के बीच गुम होता रहेगा।
आयुर्वेद चिकित्सालय संचालित लेकिन लंबे समय से चिकित्सक का पद रिक्त
वही बजट घोषणा मै प्राचीन चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद का लाभ देने के लिए सुमेरपुर में संचालित आयुर्वेदिक चिकित्सालय को ब्लॉक आयुर्वेदिक चिकित्सालय में क्रमोन्नत किये जाने की घोषणा की है। लेकिन तखतगढ सीएचसी मे आयुर्वेदिक हॉस्पिटल चिकिसालय पहले से ही चलता आ रहा है। लेकिन लम्बे समय से आयुर्वेदिक चिकित्सक की पोस्ट खाली है..जिस का किसी को कोई लाभ नही मिल रहा।


