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जोधपुर-राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर मुख्यपीठ ने बाड़मेर जिले में ग्राम पंचायतों के पुनर्गठन और सीमांकन को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा 20 नवंबर 2025 को जारी अधिसूचना को वैध मानते हुए स्पष्ट किया कि वर्तमान में चुनाव प्रक्रिया जारी है। ऐसे में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप उचित नहीं है।
कोर्ट ने कहा- पंचायतों के मुख्यालय बदलने या पुनर्गठन से याचिकाकर्ताओं के संवैधानिक या कानूनी अधिकार का उल्लंघन नहीं होता है।
जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ ने प्रेमसुख व अन्य बनाम राजस्थान राज्य मामले में यह फैसला सुनाया।
बाड़मेर जिले के केरली, दांदली और हनुमान सागर निवासी प्रेमसुख, चेतनराम और बालाराम सहित 10 याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में डीबी सिविल रिट याचिका दायर की थी। याचिका में राज्य सरकार द्वारा 20 नवंबर 2025 को जारी उस अधिसूचना को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत जिला कलेक्टर की सिफारिश पर बाड़मेर जिले की ग्राम पंचायतों का पुनर्गठन, पुनर्निर्धारण और सृजन किया गया था। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि यह प्रक्रिया नियमों के अनुरूप नहीं है, इसलिए इस पर रोक लगाई जानी चाहिए।
हाईकोर्ट का निर्णय और टिप्पणियां
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि इसी तरह की अधिसूचनाओं को जयपुर पीठ में भी चुनौती दी गई थी। जोधपुर डिवीजन बेंच ने जयपुर पीठ द्वारा 21 जनवरी को ‘सुनील जांगिड़ बनाम राजस्थान राज्य’ मामले में दिए गए फैसले से सहमति जताई।
पुराने फैसलों का दिया हवाला
कोर्ट ने अपने फैसले में शीला कुमारी और सिंहानिया गांव के निवासियों से जुड़े पुराने मामलों का भी जिक्र किया। कोर्ट ने कहा- यदि किसी ग्राम पंचायत को प्रबंधन या सेवाओं के वितरण में कोई कठिनाई आती है तो वे मुख्यालय बदलने के लिए सक्षम अधिकारियों के पास जाने के लिए स्वतंत्र हैं। इसके आधार पर पूरी पुनर्गठन प्रक्रिया को रद्द नहीं किया जा सकता।
अदालत ने अंततः 20 नवंबर 2025 की अधिसूचना को बरकरार रखते हुए याचिका और स्थगन आवेदन दोनों को निस्तारित कर दिया। मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील सुनील चौधरी और सरकार की ओर से कुलदीप सिंह सोलंकी ने पैरवी की।

