PALI SIROHI ONLINE
जय नारायण सिंह सोजत
प्रशासन की ‘बसों’ में तेल खत्म या संवेदनाएं मर चुकी हैं? पाली-बिलाड़ा-बोरुंदा रूट पर रोडवेज की मनमर्जी ने आमजन का जीना मुहाल किया
सोजत रोड । राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (RSRTC) के अधिकारी एसी कमरों में बैठकर फाइलों के पहिये घुमा रहे हैं, जबकि धरातल पर आम जनता, मजदूर और विद्यार्थी परिवहन व्यवस्था के अभाव में दम तोड़ रहे हैं। पिछले 20 वर्षों से निरंतर चल रही पाली-बिलाड़ा रूट की अंतिम रोडवेज बस को पाली डिपो प्रबंधक ने अपनी ‘मनमर्जी’ की भेंट चढ़ा दिया है। आलम यह है कि शाम 4:30 बजे पाली से और 6:00 बजे सोजत से निकलने वाली यह बस अब सिर्फ कागजों या यादों में रह गई है।
विद्यार्थी बेहाल, मजदूरों की जेब पर डाका:
यह महज एक बस नहीं, बल्कि उन मजदूरों के लिए ‘जीवनदायिनी’ थी जो दिन भर की कड़ी मेहनत के बाद अपने घर लौटते थे। योगा एक्सप्रेस से आने वाले यात्री भी इसी बस के भरोसे रहते थे। अब बस बंद होने से निजी टैक्सी चालक आमजन से ‘मुंह मांगी’ कीमत वसूल रहे हैं। प्रशासन शायद यह भूल गया है कि एक गरीब मजदूर के लिए निजी टैक्सी का किराया चुकाना उसके बच्चों के निवाले छीनने जैसा है।
बोरुंदा रूट पर भी लगा ‘ब्रेक’:
सिर्फ पाली-बिलाड़ा ही नहीं, बल्कि बिलाड़ा से बोरुंदा और वापसी के रूट पर भी रोडवेज बसों को बंद कर दिया गया है। शिक्षा के लिए एक कस्बे से दूसरे कस्बे जाने वाले विद्यार्थियों और अपना छोटा-मोटा व्यापार करने वाली महिलाओं के लिए यह फैसला किसी सजा से कम नहीं है।
डिपो प्रबंधक की तानाशाही या लापरवाही?
20 साल से चल रहे रूट को अचानक बंद करना प्रबंधन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या प्रशासन को जनता की सुविधा से ज्यादा निजी बस ऑपरेटरों को फायदा पहुंचाने में दिलचस्पी है? आखिर किसके इशारे पर जनता की इस बुनियादी जरूरत का गला घोंटा गया है?
चेतावनी:
यदि जल्द ही पाली-सोजत-बिलाड़ा-बोरुंदा रूट पर रोडवेज की इन बसों को बहाल नहीं किया गया, तो क्षेत्र की जनता सड़कों पर उतरने को मजबूर होगी। प्रशासन को चाहिए कि वो कुंभकर्णी नींद से जागे और जनता के सब्र का इम्तिहान लेना बंद करे। इस बारे में डिपो प्रबंधक पाली से दूरभाष पर वार्ता करने पर एक ही जवाब मिलता है की स्टाफ नहीं है जब स्टाफ नहीं है तो फिर नए रूट में बसे क्यों शुरू कर रहे हैं डिपो प्रबंधक?

