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गोल्ड–सिल्वर की तेज महंगाई, आम नागरिक बेबस, संसद में भड़के नीरज डांगी
नई दिल्ली। देश में गोल्ड और सिल्वर की आसमान छूती कीमतें अब किसी वैश्विक मजबूरी का नतीजा नहीं, बल्कि केंद्र सरकार की जनविरोधी आर्थिक नीतियों का सीधा परिणाम बन चुकी हैं। बजट सत्र के दौरान राज्यसभा में सांसद नीरज डांगी ने इस मुद्दे पर सरकार के खिलाफ खुला मोर्चा खोलते हुए कहा कि गोल्ड और सिल्वर की कीमतों को बेलगाम छोड़ देना सरकार की अक्षमता नहीं, बल्कि उसकी नीयत को उजागर करता है। सांसद डांगी ने गोल्ड और सिल्वर से तत्काल इंपोर्ट ड्यूटी हटाने और जीएसटी घटाने की मांग की है।
राज्यसभा में सांसद डांगी ने बिना किसी लाग-लपेट के सरकार की नीतियों पर हमलावर अंदाज में सदन को बताया कि दिसंबर 2024 से दिसंबर 2025 के बीच सिल्वर 306 प्रतिशत और गोल्ड 111 प्रतिशत तक महंगा हो चुका है। उन्होंने कहा कि इतनी भयावह बढ़ोतरी किसी प्राकृतिक या वैश्विक संकट की देन नहीं है, बल्कि यह सरकार की नीतिगत लापरवाही और जमाखोरों को दिए गए संरक्षण का परिणाम है। सांसद डांगी का मानना है कि जीएसटी हटाकर और इंपोर्ट ड्यूटी घटाकर जनता को तत्काल राहत दी जा सकती है।
डांगी ने कहा कि भारत में गोल्ड और सिल्वर केवल ज्वेलरी नहीं हैं। यह किसान, मजदूर और मध्यम वर्ग की बचत, सुरक्षा और सम्मान से भी जुड़े हैं। हमारी परंपरा में बेटी के विवाह में गोल्ड-सिल्वर देना कोई शौक नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी और ज्यादातर मामलों में मजबूरी मानी जाती है। लेकिन आज हालात यह हैं कि किसान और गरीब परिवार अपनी बेटी की शादी के लिए भी गोल्ड या सिल्वर के गहने नहीं खरीद पा रहे। यह सरकार की नीतियों द्वारा आम जनता पर थोपी गई सजा है। सांसद ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों से एक तरफ जमाखोर और मुनाफाखोर मालामाल हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आम आदमी की सामाजिक और आर्थिक रीढ़ तोड़ी जा रही है। विवाह टल रहे हैं, परंपराएं सिमट रही हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दम तोड़ रही है, लेकिन सरकार को इसकी कोई परवाह नहीं।
गोल्ड सिल्वर के तेजी से बढ़ते रेट की वजह से ज्वेलरी उद्योग की बदहाली पर डांगी का मानना हैं कि कि देश में इस व्यापार से जुड़े करीब 50 लाख परिवार आज रोजी रोटी के संकट से गुजर रहे हैं। ज्वेलर्स की दुकानें खाली हैं, कारीगर बेरोजगार हैं और कर्मचारियों की आमदनी खत्म हो चुकी है। उन्होंने कहा कि सरकार की गलत नीतियों ने एक पूरे पारंपरिक उद्योग को बर्बादी के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। डांगी ने केंद्र सरकार पर सीधा आरोप लगाया कि ऊंचा आयात शुल्क और जीएसटी बनाए रखकर सरकार जानबूझकर कीमतों को ऊंचा रख रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार चाहती, तो टैक्स में कटौती कर आम लोगों को राहत दे सकती थी, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया, क्योंकि उसकी प्राथमिकता आम जनता नहीं, बल्कि चंद मुनाफाखोर हैं।
राज्यसभा में गोल्ड और सिल्वर को पूरी तरह बाजार के भरोसे छोड़ देने से इसके रेट तेजी से बढ़ने का जिक्र करते हुए सांसद नीरज डांगी ने कहा कि यह सरकार की आर्थिक विफलता का सबसे बड़ा सबूत है। जब जनता महंगाई से त्रस्त हो और सरकार मूकदर्शक बनी रहे, तो यह केवल लापरवाही नहीं, सामाजिक अपराध है। डांगी ने तीखे शब्दों में सरकार पर हमला बोला। उन्होंने सरकार से तत्काल गोल्ड और सिल्वर पर आयात शुल्क और जीएसटी में कटौती करने, जमाखोरी पर सख्त कार्रवाई करने और बाजार में सीधा हस्तक्षेप करने की मांग की। बाद में सदन के बाहर पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए, तो यह मुद्दा केवल संसद तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सड़कों पर जनता का आक्रोश बनकर भी फूटेगा।
राज्यसभा में सांसद नीरज डांगी का बयान सरकार के खिलाफ एक साफ राजनीतिक चेतावनी है। क्योंकि गोल्ड और सिल्वर का यह सवाल अब केवल उसकी महंगाई का नहीं, बल्कि इस बात का है कि सरकार किसके साथ खड़ी है, भारत की आम जनता के साथ या गोल्ड और सिल्वर के जमाखोरों के साथ। सदन में गोल्ड और सिल्वर के इस मुद्दे पर सांसद नीरज डांगी जब बोल रहे थे, तो अन्य सांसद भी उनके इस खास विषय को ध्यान से सुन रहे थे। इसी से समझा जा रहा है कि यह मुद्दा कितना अहम है।

