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बेंगलुरु (दलपतसिंह भायल)
राजपूत समाज कोट्टनपेठ द्वारा श्री चामुंडा माताजी मंदिर का 14वां वार्षिकोत्सव श्रद्धा व भव्यता के साथ संपन्न
भक्ति, परंपरा और सामाजिक एकता का अनुपम संगम, माताजी के जयकारों से गूंजा परिसर
राजपूत समाज कोट्टनपेठ (पंजीकृत) के तत्वावधान में स्थित श्री चामुंडा माताजी मंदिर का 14वां वार्षिकोत्सव बुधवार, 28 जनवरी 2026 को अत्यंत श्रद्धा, भक्ति, अनुशासन एवं धार्मिक उल्लास के वातावरण में भव्य रूप से मनाया गया। इस पावन अवसर पर बेंगलुरु सहित आसपास के क्षेत्रों से समाज के वरिष्ठजन, माताएं-बहनें, युवा वर्ग एवं बच्चों ने सपरिवार सहभागिता कर आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।
वार्षिकोत्सव कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 10:30 बजे विधिवत वैदिक मंत्रोच्चार, गणेश वंदना एवं मंगलाचरण के साथ हुआ। इसके पश्चात श्री चामुंडा माताजी की विशेष पूजा-अर्चना, पंचामृत अभिषेक, हवन-यज्ञ एवं वैदिक अनुष्ठानों का विधिपूर्वक आयोजन किया गया। पुरोहितों द्वारा उच्चारित मंत्रों से संपूर्ण मंदिर परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत हो उठा।
दोपहर के समय माताजी की भव्य महाआरती का आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थित श्रद्धालुओं ने दीप प्रज्वलित कर माताजी की आराधना की। एक साथ गूंजते माताजी के जयकारों, शंखनाद एवं घंटानाद से संपूर्ण वातावरण भक्तिरस में डूब गया। श्रद्धालुओं की आंखों में आस्था, चेहरे पर श्रद्धा और मन में भक्ति का भाव स्पष्ट रूप से झलक रहा था।
इस अवसर पर मंदिर परिसर को रंग-बिरंगे पुष्पों, आकर्षक विद्युत सज्जा, तोरण द्वारों एवं धार्मिक ध्वज-पताकाओं से अत्यंत भव्य रूप से सजाया गया था। दिनभर श्रद्धालुओं की निरंतर आवाजाही बनी रही। भक्तों ने माताजी के दर्शन कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि, समाज की उन्नति, युवाओं के उज्ज्वल भविष्य एवं विश्व कल्याण की कामना की।
कार्यक्रम के दौरान राजपूत समाज कोट्टनपेठ के पदाधिकारियों एवं समाज के गणमान्यजनों ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि श्री चामुंडा माताजी मंदिर केवल एक पूजा स्थल नहीं, बल्कि समाज की आस्था, संस्कार, परंपरा और एकता का सशक्त केंद्र है। माताजी की कृपा से यह मंदिर विगत 14 वर्षों से समाज को धार्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक रूप से जोड़ने का कार्य कर रहा है।
पदाधिकारियों ने कहा कि वार्षिकोत्सव जैसे आयोजनों के माध्यम से समाज में धार्मिक चेतना का प्रसार होता है तथा युवा पीढ़ी अपने संस्कारों, संस्कृति और गौरवशाली परंपराओं से जुड़ती है। समाज के वरिष्ठजनों ने युवाओं को अनुशासन, सेवा भाव एवं सामाजिक उत्तरदायित्व को जीवन का अभिन्न अंग बनाने का संदेश दिया।
वार्षिकोत्सव के समापन अवसर पर चढ़ावे के लाभार्थियों का सम्मानपूर्वक बहुमान किया गया। तत्पश्चात माताजी के महाप्रसाद का वितरण किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने पंक्तिबद्ध होकर प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन की व्यवस्था, अनुशासन एवं भक्ति भाव की उपस्थित श्रद्धालुओं ने मुक्त कंठ से सराहना की।
समाजजनों एवं श्रद्धालुओं ने इस भव्य आयोजन को अत्यंत सफल, प्रेरणादायी एवं अनुकरणीय बताते हुए राजपूत समाज कोट्टनपेठ की कार्यशैली की प्रशंसा की तथा भविष्य में भी ऐसे आयोजनों की निरंतरता की कामना की।

