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सिरोही-सिरोही जिले में अरावली पर्वत श्रृंखला को बचाने के लिए जनआंदोलन तेज हो गया है। मेसर्स कमलेश मेटाकास्ट प्राइवेट लिमिटेड की प्रस्तावित चूना पत्थर खनन परियोजना के खिलाफ ग्रामीणों का आक्रोश सड़कों पर दिखाई दे रहा है। शनिवार को हजारों ग्रामीणों ने करीब 800 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रस्तावित इस खनन परियोजना को निरस्त करने की मांग को लेकर पैदल जनजागृति पदयात्रा निकाली।
यह पदयात्रा भारजा गांव से शुरू हुई। यह तरूंगी, भीमाना, वाटेरा और रोहिड़ा होते हुए शाम को स्वरूपगंज पहुंची, जहां पदयात्रियों ने रात्रि विश्राम किया। इस पदयात्रा का मुख्य उद्देश्य अरावली पर्वतमाला को बचाना और इस खनन परियोजना को रद्द कराना है।
इस आंदोलन की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह रही कि इसमें शामिल लोग अपने घरों से सूखी रोटियां, अचार और चटनी लेकर आए थे। उन्होंने सड़क किनारे बैठकर भोजन किया। यह दृश्य किसी चुनावी सभा का नहीं, बल्कि उन लोगों की पीड़ा को दर्शाता था, जिनका जीवन, खेती, पानी और जंगल इस परियोजना से प्रभावित हो सकते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि इस खनन परियोजना से क्षेत्र के जल स्रोत सूख जाएंगे, कृषि भूमि बंजर हो जाएगी और अरावली की जैव विविधता को गंभीर क्षति पहुंचेगी। वे इस परियोजना को अपने अस्तित्व के लिए खतरा मान रहे हैं।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि आंदोलन को कुचलने के लिए सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया जा रहा है। पदयात्रा के साथ पुलिस बल भी सुरक्षा के नाम पर तैनात रहा। हालांकि, आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि वे किसी भी कानूनी कार्रवाई से डरने वाले नहीं हैं और अपने जल, जमीन तथा जंगल के लिए संघर्ष जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि यह उनके अस्तित्व का सवाल है और वे सरकार के दबाव में पीछे नहीं हटेंगे।
गांव-गांव मिला समर्थन, बाजारों में फूलमालाओं से स्वागत
पदयात्रा के दौरान वाटेरा, भीमाना, भारजा और रोहिड़ा के बाजारों में ग्रामीणों ने जोरदार स्वागत किया। फूल मालाएं पहनाई गईं, स्वागत गीत गाए गए और आंदोलनकारियों का उत्साह बढ़ाया गया। लोगों ने हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया। इस जनसमर्थन से साफ हो गया है कि अब यह आंदोलन केवल कुछ गांवों तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की सामूहिक आवाज बन चुका है।
अरावली के महत्व को समझाने का अभियान
जनजागृति पदयात्रा का उद्देश्य केवल विरोध करना नहीं, बल्कि लोगों को अरावली पर्वत श्रृंखला के पर्यावरणीय महत्व के बारे में जागरूक करना भी है। आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर लोगों को समझा रहे हैं कि अरावली राजस्थान की जीवन रेखा है। यही पहाड़ बारिश का पानी रोकते हैं। यही जंगल जल स्रोतों को जीवित रखते हैं।
परियोजना निरस्त करने की अपील
ग्रामीणों ने कहा कि समय रहते सरकार ने यह परियोजना निरस्त नहीं की, तो आने वाली पीढ़ियां उन्हें कभी माफ नहीं करेंगी। ग्रामीणों की एक ही मांग कि कमलेश मेटाकास्ट प्राइवेट लिमिटेड की प्रस्तावित खनन परियोजना को तत्काल रद्द किया जाए
