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जोधपुर-प्रतापगढ़ में पुलिस की कथित बर्बरता का मामला राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर बेंच में पहुंच गया। पुलिस अधिकारियों पर आरोप है कि प्रतापगढ़ पुलिस ने अब्दुल हमीद शेख के घर में घुसकर परिवार के साथ मारपीट और लूटपाट की। युवक के हाथ-पैर तोड़ने के बाद उसे पुराने एनडीपीएस केस में फंसाने के लिए उसकी जेब में मोबाइल भी रख दिया।
मामले की गंभीरता देखते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया। जोधपुर बेंच के जस्टिस फरजंद अली की कोर्ट ने 20 जनवरी को सुनवाई करते हुए युवक के शरीर पर चोटों की तस्वीरें देखकर इसे प्रथम दृष्टया “जानवरों जैसा सुलूक” और “कस्टोडियल टॉर्चर” माना। कोर्ट ने तत्काल प्रभाव से संबंधित थानाधिकारी को थाने से हटाने और ड्यूटी से दूर रखने के आदेश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 23 जनवरी को होगी।
पहले जानें 31 दिसंबर की रात का पूरा घटनाक्रम याचिकाकर्ता शाकिर शेख की ओर से वकील ने कोर्ट को बताया- घटना 31 दिसंबर 2025 और 1 जनवरी 2026 की रात की है। आरोप है कि पुलिस अधिकारी और उनकी टीम ने शाकिर शेख के घर में जबरन प्रवेश किया। उन्होंने याचिकाकर्ता के पिता अब्दुल हमीद शेख और अन्य व्यक्ति के साथ घातक हथियारों से मारपीट की और कीमती सामान लूट लिया।
पीड़ित के वकील रॉबिन सिंह ने बताया- प्रतापगढ़ एसएचओ दीपक बंजारा के खिलाफ इस्तगासा पेश किया था। उसी को कोर्ट ने पुलिस थाने से हटाने के आदेश दिए हैं।
4 साल पुराने केस में फंसाने के लिए जेब में डाला मोबाइल याचिकाकर्ता का आरोप है कि पुलिस ने उसके हाथ और पैर तोड़ दिए। इसके बाद उसे अपराधी साबित करने के लिए उसकी जेब में एक मोबाइल फोन प्लांट कर दिया। पुलिस ने मोबाइल का कनेक्शन 4 साल पुराने एनडीपीएस मामले (जिसमें धारा 29 का मुल्जिम फरार था) से जोड़कर झूठी बरामदगी दिखा दी, ताकि उसे जेल भेजा जा सके।
कोर्ट की तल्ख टिप्पणीः यह कस्टोडियल टॉर्चर सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने जब घायल युवक की तस्वीरें पेश की गईं तो जस्टिस फरजंद अली ने कड़ी नाराजगी जताई।
हाईकोर्ट के 5 कड़े निर्देश
SHO को तुरंत हटाएं: कोर्ट ने एसपी प्रतापगढ़ को निर्देश दिया है कि आरोपी थानाधिकारी को तुरंत प्रभाव से पुलिस थाने से दूर किया जाए। जब तक अगला आदेश नहीं आता, वह उस पुलिस सर्किल में कोई ड्यूटी नहीं करेगा और न ही जांच को प्रभावित करेगा।
CBI जांच पर जवाब तलब: कोर्ट ने एसपी से विस्तृत शपथ पत्र मांगा कि क्यों न मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या सीबीआई को सौंप दी जाए?
सबूतों से छेड़छाड़ नहीं: एसपी व्यक्तिगत रूप से सुनिश्चित
करेंगे कि सीसीटीवी फुटेज, कॉल रिकॉर्ड्स और केस डायरी के साथ कोई छेड़छाड़ न हो। आरोपी अधिकारी को केस डायरी छूने या परिवादी से संपर्क करने की इजाजत नहीं होगी।
एडिशनल एसपी होंगे पेशः मामले की अगली सुनवाई 23 जनवरी को होगी। उस दिन एडिशनल एसपी को एफआईआर की केस डायरी के साथ कोर्ट में खुद पेश होना होगा।
आईजी रेंज भी देखें: कोर्ट ने आईजी रेंज को भी निर्देश दिया कि पुलिस अधिकारी के इस दंडनीय कृत्य को वे खुद देखें।

