PALI SIROHI ONLINE
उदयपुर-उदयपुर से करीब 35 किलोमीटर दूर जावर माता शक्तिपीठ में बीती रात चोरी की बड़ी वारदात सामने आई है। अज्ञात चोर मंदिर से माताजी के चांदी के आभूषण और दानपात्र में रखी नकदी लेकर फरार हो गए। चोरों ने दान पेटी और गर्भगृह के ताले तोड़कर करीब साढ़े चार किलो चांदी के मुकुट, छत्र और अन्य आभूषणों के साथ 4 से 5 लाख रुपए की नकदी चोरी कर ली।
घटना के बाद जावर गांव के ग्रामीणों ने पुलिस को लिखित रिपोर्ट सौंपी, जिस पर टीडी थाना पुलिस मौके पर पहुंचकर जांच में जुट गई है।
संयुक्त हस्ताक्षर के साथ पुलिस को दी रिपोर्ट में बताया कि शुक्रवार देर रात को अज्ञात चोरों ने मंदिर की दान पेटी का ताला तोड़ दिया और उसमें रखी नकदी ले गए।
चांदी के ये आभूषण हुए चोरी
ग्रामीणों ने बताया कि 1.25 किलो वजन का चांदी का मुकुट, 750 ग्राम का चांदी का छत्र, 620 ग्राम के चरण पायल, 22 तोला के चांदी के मेडल, चांदी की 4 कटोरियां और 4 थालियां, बड़ी चांदी की कटोरी, चांदी के तिलम, बिछुआ और रजड़ी सहित करीब साढ़े 5 किलो चांदी के आभूषण शामिल है।
हर तीन महीने में खोलते है दान पात्र
पुजारी जगदीश ने बताया कि वह हमेशा सभी आभूषण अपने घर लेकर जाता है, लेकिन शुक्रवार की रात को वह घर ले जाना भूल गया। बताते है कि दान पेटी 3 माह बाद इसी सप्ताह में खुलने वाली थी, जिसमें करीब 4 से 5 लाख रुपए की राशि थी। उनका कहना है कि यहां हर तीन महीने में जब दान पेटी खोलते है तब औसत इतनी ही राशि निकलती है।
टीडी थाने से पुलिस की टीम पहुंची
सूचना पर सरपंच प्रकाश चंद्र मीणा और बड़ी संख्या में
ग्रामीण मौके पर पहुंचे और टीडी पुलिस को घटना की जानकारी दी। टीडी पुलिस थाने से एएसआई कालूराम मौके पर आए और घटना की पूरी जानकारी ली।
एएसआई कालूराम ने बताया कि मौका पर्चा बनाने के साथ ही जांच शुरू कर दी गई है।
ग्रामीणों की आमसभा, आक्रोश जताया
चोरी की घटना के बाद ग्रामीणों ने आमसभा बुलाई और चोरी को लेकर आक्रोश जताया। ग्रामीणों ने कहा कि मंदिर में करीब 6 महीने से सीसीटीवी कैमरे बंद पड़े हैं, इसके अलावा रात में तैनात गार्ड के घर पर मौत होने के कारण छुट्टी पर चल रहा है। ऐसे में मंदिर में दूसरे गार्ड को भी नहीं लगाया गया है।
यह सारी व्यवस्था देवस्थान विभाग को करनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया और ये चोरी की वारदात हो गई। आमसभा में ही ग्रामीणों ने पुजारी जगदीश को चोरी का खुलासा नहीं होने तक गर्भ गृह में जाने के लिए मना किया। साथ ही देवस्थान विभाग से मंदिर को ग्रामीण कमेटी को सौंपने की मांग की।

