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सिरोही-पिंडवाड़ा व सरूपगंज में रेलवे जंक्शन बनाए जाने को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों के बीच सांसद लुंबाराम चौधरी ने स्पष्ट किया कि सिरोही जिले को रेलवे नेटवर्क से जोड़ना उनकी पहली प्राथमिकता है, लेकिन पिंडवाड़ा या सरूपगंज में जंक्शन बनाए जाने का न तो कभी कोई आधिकारिक आदेश था और न ही वर्तमान में है। गुरुवार को एक निजी होटल में पत्रकारों से बातचीत में सांसद चौधरी ने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर भ्रम फैला रहे हैं।
उन्होंने कहा कि रेलवे मार्ग और स्टेशन से जुड़े सभी निर्णय रेलवे के तकनीशियन, इंजीनियर और रेलवे बोर्ड तकनीकी व फिजिबिलिटी के आधार पर लेते हैं। सांसद ने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक नेता इस योजना को विफल करने और आमजन को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। विधायक समाराम गरासिया, भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. रक्षा भंडारी, जिला महामंत्री नरपतसिंह राणावत आदि मौजूद रहे। सांसद ने बताया कि पिंडवाड़ा के लिए किए गए प्रयासों में वर्ष 2016 में ही फिजिबिलिटी नहीं पाई गई थी। रेलवे की ओर से हर स्तर पर ‘ना’ में जवाब मिला।
उन्होंने बताया कि 27 नवंबर 2024 और 24 जुलाई 2025 को पूछे गए सवालों के जवाब में रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने 28 नवंबर 2024 को स्पष्ट किया कि सिरोही-मारवाड़-बागरा-पिंडवाड़ा की 96 किमी लंबी प्रस्तावित रेल लाइन कम यातायात अनुमान के कारण आगे नहीं बढ़ाई जा सकी। सांसद चौधरी ने बताया कि बागरा-सिरोही रेलवे लाइन को पिंडवाड़ा और सरूपगंज के बीच तकनीकी रूप से उपयुक्त स्थान से जोड़ा जाएगा। सिरोही जिला मुख्यालय के लिए प्रस्तावित रेलवे स्टेशन 5 किलोमीटर के दायरे में रहेगा। उन्होंने कहा कि सांसद बनने के बाद लगातार 8 महीने तक पिंडवाड़ा को रेल नेटवर्क से जोड़ने के प्रयास किए गए और इस मुद्दे को लोकसभा में भी उठाया गया। पिंडवाड़ा-बागरा लाइन फिजिबल नहीं होने के बाद सांसद चौधरी ने सिरोही को रेल नेटवर्क से जोड़ने के लिए नए सिरे से पहल की। 6 फरवरी 2025 को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर स्वरूपगंज से वाया सिरोही बागरा तक नई रेल लाइन का प्रस्ताव रखा।
रेल मंत्री ने 12 फरवरी को संबंधित निदेशालय को पुनः सर्वे और विस्तृत जांच के निर्देश दिए। इसके बाद रेलवे बोर्ड ने 9 जून को मारवाड़-बागरा-सिरोही-सरूपगंज नई रेल लाइन के फाइनल लोकेशन सर्वे के लिए 2.40 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत किया। रेलवे नई लाइन के सर्वे के बाद लागत और संभावित आय का आकलन करता है।
परियोजना से आय की संभावना नहीं होती तो रद्द कर दिया जाता है। इसे रेलवे की भाषा में रेट ऑफ रिटर्न कहा जाता है। 24 जून 2016 को किए मारवाड़-बागरा-सिरोही – पिंडवाड़ा रेललाइन सर्वे में रेट ऑफ रिटर्न (-6.25) रहा, जो नुकसानदायक था। इसी कारण योजना प्रारंभिक स्तर पर ही निरस्त कर दी गई। सर्वे में न अंतिम लोकेशन तय हुई और न डीपीआर तैयार की थी।

