जालोर-श्रीयादे सेवा संस्थान जालोर का तेरहवाँ सामूहिक विवाह समारोह 21 अप्रैल को, तैयारीया युद्ध स्तर पर
PALI SIROHI ONLINE
खीमाराम मेवाडा
श्रीयादे सेवा संस्थान जालोर का तेरहवाँ सामूहिक विवाह समारोह 21 अप्रैल को, तैयारीया युद्ध स्तर पर
मारू कुम्हार समाज के 12 वर-वधू दाम्पत्य परिणय बंधन में बंधेगे।
तखतगढ 10 अप्रैल (खीमाराम मेवाडा) जालोर की पावन धरा पर श्री श्रीयादे माँ की पावन अनुकम्पा एवं श्री गोविन्द वल्लभदासजी महाराज के आशीर्वाद से श्रीयादे सेवा संस्थान, जालोर द्वारा समाजोत्थान लक्ष्य के साथ तेरहवाँ सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन अक्षय तृतीया
19 अप्रेल को श्री शिव होटल एण्ड रेस्टोरेंट, बागोड़ा रोड़, जालोर मे होने जा रहा है। तेरहवाँ सामूहिक विवाह समारोह आयोजन को लेकर श्रीयादे सेवा संस्थान के कार्यकारिणी सदस्य एवं समस्त मारू कुम्हार समाज बंधु तैयारी में जुटे हुए हैं। संस्थान द्वारा गठित अलग-अलग कमेटियों द्वारा पाली जालौर सिरोही जिले के गांव गांव पत्रिका वितरण से लेकर विभिन्न व्यवस्थाओं की तैयारीया युद्ध स्तर पर शुरू कर दी है। तखतगढ़ पत्रिका आमंत्रण देने पहुंचे श्रीयादे सेवा संस्थान के प्रतिनिधि मंडल के पदाधिकारी ने बताया कि आगामी अक्षय तृतीया 19 अप्रैल को श्री शिव होटल एण्ड रेस्टोरेंट, बागोड़ा रोड़, जालोर मे तेरहवाँ सामूहिक विवाह समाहारो आयोजन होने जा रहा है। इस सामूहिक विवाह में मारू कुम्हार समाज के 12 वर-वधू दाम्पत्य परिणय बंधन में बंधेगे। सामूहिक विवाह समारोह के मुख्य अतिथि राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत होंगे। इस मांगलिक कार्यक्रम के अवसर पर नव दम्पत्तियों को शुभाशीर्वाद प्रदान करेंगे।
यह होगे भांगलिक कार्यक्रम
तेरहवाँ सामूहिक विवाह समाहारो अक्षय तृतीया 19 अप्रैल की सुबह 8 बजे साम्हेला व तोरण वदावणा की रस्म के बाद सभी वर-वधु अपने अपने विवाह वेदिकाओं पर पहुचने के बाद 9 बजे पंडित राकेश दवे सहित विभिन्न पंडितों के सानिध्य में सभी 12 वर वधु जोडो का हस्तमिलाप के साथ अग्नि को साक्षी मानते हुए 7 फेरे लेकर जीवन के बंधन में बंधेंगे और 10 सामूहिक प्रीतिभोज का आयोजन के बाद दोपहर 12 बजे भामाशाह एवं अतिथियों का सम्मान किया जाएगा। और 1:00 पाट डोरिया (वैवार) की रस्म के बाद 3 बजे वर वधु को आशीर्वाद के साथ विदाई दी जाएगी।
यह है आवश्यक निर्देश
वर वध पक्ष को दिनांक 19 अप्रेल 2026 को प्रात: 7.00 बजे विवाह स्थल पर उपस्थित रहना अनिवार्य है।
तत्पश्चात् क्रमानुसार डेरों का आवंटन किया जायेगा।
कार्यक्रम में ढोल पर नाचना, आतिशबाजी करना व ईनाम देना पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा।
यदि कोई बंधु कन्यादान स्वरूप उपहार देना चाहे तो समस्त जोड़ों को समान रूप से देना होगा और इसके लिए मंडल से स्वीकृक्ति लेना अनिवार्य होगा।
विवाह कार्यक्रम समाज द्वारा प्रचलित सनातन धर्म पद्धति से पूर्ण विधि अनुसार होगा।
भोजनशाला में पुरुषों एवं महिलाओं के लिए भोजन व्यवस्था अलग-अलग होगी।
वर-वध अपने दो दो अभिभावकों के साथ विवाह वेदिकाओं पर अपने आवंटित नम्बर अनुसार स्थान ग्रहण करेंगे।
कोई भी बन्धु समारोह स्थल पर किसी भी प्रकार का व्यक्तिगत अथवा सामाजिक आपसी विवाद एवं अनुचित कार्य नहीं करेगा।
समारोह स्थल पर डोरिये की व्यवस्था सुविधानुसार की जायेगी। किसी भी समस्या पर सर्वाधिकार संस्थान के पास सुरक्षित रहेंगे


