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पाली-पाली नगर निगम में महापौर चुनाव के दौरान सामने आई बगावत और भीतरघात के बाद कांग्रेस में सियासी भूचाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। पार्टी से बगावत कर राजबाला हिंगड़ को निर्दलीय महापौर प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतारने वाले वरिष्ठ नेता 29 पार्षदों के साथ जयपुर पहुंचे।
शुक्रवार को एसएमएस हॉस्पिटल के पीछे स्थित कांग्रेस के प्रदेश वॉर रूम में पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेशजांच कमिटी के सचिव रामसिंह कस्वा और शकुंतला राव से मुलाकात की। करीब एक घंटे तक चली इस उच्चस्तरीय बैठक में बागी नेताओं ने अपना पक्ष मजबूती से रखा।
जांच कमेटी के समक्ष अपनी बात रखने वाली पांच सदस्यीय टीम में प्रदीप हिंगड़, राकेश भाटी, मेहबूब टी, हकीम भाई और एक निर्दलीय पार्षद शामिल थे।
बैठक में उठाई गईं प्रमुख मांगें और गंभीर आरोप
सिंबल आवंटन में गड़बड़ी का आरोपः प्रतिनिधिमंडल ने जांच कमेटी को बताया कि शहर के अधिकतर पार्षद राजबाला हिंगड़ को कांग्रेस का अधिकृत महापौर प्रत्याशी बनाना चाहते थे। सभी पार्षदों ने अपनी यह स्पष्ट मंशा स्थानीय कांग्रेस विधायक भीमराज भाटी को बता दी थी। आरोप लगाया गया कि जयपुर से सिंबल जारी होने और पाली पहुंचने के बीच में सांठगांठ व गड़बड़ी की गई, जिसके तहत सुमित्रा जैन को पार्टी का अधिकृत प्रत्याशी बना दिया गया। इसी वादाखिलाफी और गड़बड़ी के विरोध स्वरूप राजबाला हिंगड़ को निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरना पड़ा।
बहुमत के बावजूद गंवाया बोर्ड: बागी गुट ने दावा किया कि पाली नगर निगम के 65 वार्डों में से 29 पार्षदों ने कांग्रेस के निशान पर जीत दर्ज की थी, जबकि भाजपा को मात्र 21 सीटें मिली थीं। 15 निर्दलीयों में से भी लगभग 10 पार्षदकांग्रेस विचारधारा के थे। यदि स्थानीय स्तर पर सिंबल वितरण में धांधली और क्रॉस वोटिंग नहीं होती, तो पाली में स्पष्ट रूप से कांग्रेस का बोर्ड बनता।
चुनाव के आंकड़े पेश किए: बैठक के दौरान महापौर चुनाव
के आंकड़े पेश करते हुए बताया गया कि भाजपा प्रत्याशी नमिता बुबकिया को 33 वोट मिले और वह महापौर चुनी गईं। वहीं, निर्दलीय चुनाव लड़ीं राजबाला हिंगड़ को 29 वोट मिले, जबकि कांग्रेस की आधिकारिक प्रत्याशी सुमित्रा जैन महज 3 वोटों पर सिमट गईं।
निष्पक्ष जांच और निष्कासन की मांग
नेताओं ने जांच कमिटी से मांग की है कि जयपुर से सिंबल जारी होने से लेकर पाली में जमा होने तक के पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए। सिंबल में हेरफेर करने और पार्टी को नुकसान पहुंचाने वाले दोषियों को चिन्हित कर उन्हें तुरंत कांग्रेस से निष्कासित किया जाए।
पंचायत चुनाव पर असर की चेतावनी
प्रतिनिधिमंडल ने संगठन को आगाह किया कि यदि पाली कांग्रेस में पनपी इस अंदरूनी गुटबाजी और धांधली पर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो इसका सीधा नकारात्मक असर आने वाले पंचायत चुनावों पर भी पड़ेगा। इसलिए दोषियों के खिलाफ अविलंब अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।




