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पाली-निकाय चुनाव के दौरान मिली शिकायतों की जांच करने के लिए कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंदसिंह डोटासरा ने 9 सदस्यों की टीम बनाई है। टीम अब पाली, भीलवाड़ा, भरतपुर सहित अन्य निकायों में चुनाव के दौरान मिली शिकायतों की जांच करेगी और सात दिन में रिपोर्ट कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष को सौंपेगी।
पाली जिले में निकाय चुनाव में कांग्रेस एक भी सीट पर जीत दर्ज नहीं कर सकी। नगर निगम पाली में बढ़त होने के बाद भी कांग्रेस का महापौर नहीं बन सका। महापौर का नाम पालीबदले जाने की शिकायतें हुई। नाराज होकर राजबाला हिंगड़ निर्दलीय मैदान में उतरी। कांग्रेस की आपसी लड़ाई का फायदा बीजेपी ने उठाया और नमिता बुबकिया महापौर बन गई।
कमेटी में इन्हें किया शामिल
संयोजक डॉ सीपी जोशी, सचिव रामसिंह कस्वां, सदस्य मुरालीलाल मीणा, कुलदीप इंदौरा, प्रमोद जैन भाया, शकुंतला रावत, हाकम अली, गणेश घोघरा, रघुवीरसिंह राठौड़ को शामिल किया गया है। यह टीम जांच कर सात दिनों में अपनी रिपोर्ट कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष को सौंपेगी।
निकाय चुनाव में यह रहा था रिजल्ट
बता दें कि पाली नगर निगम के 65 वार्डों में से 29 कांग्रेस, भाजपा के 21 और निर्दलीय 15 जीते थे। जिसमें 10 निर्दलीय कांग्रेस समर्पित थे। स्पष्ट दिख रहा था कि कांग्रेस निगम में बोर्ड बना लेगी। लेकिन महापौर के लिए सिंबल मिलने के चलते निर्दलीय मैदान में उतरी थी। महापौर चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी सुमित्रा जैन को 03, निर्दलीय राजबाला हिंगड़ को 29 और भाजपा की नमिता बुबकिया को 33 वोट मिले थे। इस तरह कांग्रेस की आपसी लड़ाई में भाजपा की महापौर बन गई।





