पशु की जगह कद्दू बलि की परंपरा निभाईःमोदरान के आशापुरा माताजी मंदिर में अष्टमी पर यज्ञ-अनुष्ठान, मां भगवती ने पहले सोने-चांदी के जेवर
PALI SIROHI ONLINE
मोदरान-मोदरान स्थित आशापुरा माताजी मंदिर में चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर महादुर्गा अष्टमी का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस दौरान मंदिर परिसर में भव्य यज्ञ-अनुष्ठान सम्पन्न हुआ, जिसमें पशु बलि की पुरानी परंपरा के स्थान पर प्रतीकात्मक रूप से कद्दू की बलि चढ़ाकर निभाई गई।
कद्दू की बलि चढ़ाई
मंदिर परिसर में सुबह से ही यज्ञ, हवन और विशेष पूजा-अर्चना का क्रम प्रारंभ हो गया था, जो देर शाम पूर्णाहुति के साथ संपन्न हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा।
चैत्र नवरात्रि के आठवें दिन पंडित भीमाशंकर दवे, शास्त्री अरुण दवे, शास्त्री शुभम दवे, दिनेश दवे और दिनेश त्रिवेदी द्वारा विधिवत दुर्गा सप्तशती का पाठ पूर्ण किया गया। विद्वान पंडितों के सानिध्य में महादुर्गा अष्टमी यज्ञ प्रारंभ हुआ, जिसमें रतन सिंह सोढा, जगलाल सिंह राजपुरोहित और विक्रम सिंह राजपुरोहित यजमान के रूप में शामिल हुए।
नवरात्रि के अष्टमी यज्ञ में एक विशेष परंपरा का पालन किया गया। पूर्व में दी जाने वाली पशु बलि के स्थान पर प्रतीकात्मक रूप से कद्दू की बलि चढ़ाई गई। यह परंपरा धार्मिक आस्था के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं का संदेश देती है।हवन में पूर्णाहुति और महाआरती
मंदिर ट्रस्ट ने बताया कि दिनभर चले वैदिक अनुष्ठान के बाद पूर्णाहुति दी गई। इसके पश्चात भव्य महाआरती का आयोजन हुआ, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। मां भगवती का नवीन कपड़ों और सोने-चांदी के आभूषणों से किया गया आकर्षक श्रृंगार श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। अष्टमी के पावन अवसर पर आसपास के गांवों सहित दूर-दराज क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु माताजी के दर्शन के लिए मंदिर पहुंचे।
पूरा परिसर “जय माता दी” और “मां आशापुरा के जयकारों” से गुंजायमान रहा। श्रद्धालु कतारबद्ध होकर दर्शन करते हुए अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते नजर आए। देर शाम तक भक्ति और उत्साह का माहौल बना रहा, जिसके बाद महाआरती के साथ कार्यक्रम विधिवत संपन्न हुआ।

