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जन्म से 12 दिन पहले पिता की मौत और 4 दिन बाद मां ने छोड़ा साथ, अब अनाथ भाई के लिए बहन बन गई मां

Pintu Aggarwal by Pintu Aggarwal
August 28, 2026
in Local
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जन्म से 12 दिन पहले पिता की मौत और 4 दिन बाद मां ने छोड़ा साथ, अब अनाथ भाई के लिए बहन बन गई मां

PALI SIROHI ONLINE

डूंगरपुर-: कहते हैं मां जन्म देती है और बहन उम्रभर साथ देती है लेकिन डूंगरपुर के बाकड़ा गांव के पादेड़ी फला निवासी शिल्पा लबाना की कहानी इन दोनों रिश्तों की सीमाओं से भी आगे है। शिल्पा अपने छोटे भाई हेत्विक के लिए सिर्फ बहन नहीं बनीं बल्कि मां की तरह उसकी परवरिश और देखभाल की जिम्मेदारी उठाई। भाई के जन्म के कुछ ही दिनों बाद माता-पिता का साया सिर से उठ गया तो शिल्पा ने उसे अपनी गोद में लेकर मां की कमी पूरी करने की कोशिश की।

जन्म से पहले पिता की मौत, चार दिन बाद मां भी चल बसीं
हेत्विक के जन्म से महज 12 दिन पहले उसके पिता रमेशचन्द्र लबाना का निधन हो गया था। परिवार इस दुख से उबर भी नहीं पाया था कि 31 जुलाई 2019 को हेत्विक का जन्म हुआ। जन्म के महज चार दिन बाद ही उसकी मां कैलाश देवी भी चल बसीं। ऐसे में मां की उंगली थामने की उम्र में ही हेत्विक अनाथ हो गया।घर में मातम का माहौल था और परिवार के सामने मासूम हेत्विक की परवरिश की बड़ी जिम्मेदारी थी। उस वक्त उसकी बहन शिल्पा आगे आईं। शिल्पा की शादी वर्ष 2009 में हो चुकी थी और उनका अपना परिवार भी था, लेकिन उन्होंने छोटे भाई को अकेला नहीं छोड़ा। उन्होंने हेत्विक को अपनी गोद में लिया और उसकी देखभाल की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली।

भाई के इलाज के लिए एक साल पति-बच्चों से रहीं दूर
हेत्विक बचपन से ही अक्सर बीमार रहता था। उसकी तबीयत को लेकर शिल्पा हमेशा चिंतित रहती थीं। बेहतर इलाज के लिए वह भाई को लेकर अहमदाबाद चली गईं। भाई की देखभाल और इलाज के लिए शिल्पा करीब एक साल तक अपने पति और बच्चों से दूर रहीं।

इस दौरान उन्होंने हेत्विक की दवा, इलाज और रोजमर्रा की जरूरतों का पूरा ध्यान रखा। शिल्पा के लिए भाई सिर्फ परिवार का सदस्य नहीं, बल्कि उसकी जिम्मेदारी बन चुका था। उन्होंने मां की तरह उसके स्वास्थ्य से लेकर पढ़ाई तक हर चीज पर ध्यान दिया।इस मुश्किल समय में शिल्पा के पति महेश लबाना ने भी उनका पूरा साथ दिया। उन्होंने पत्नी के फैसले को समझा और हेत्विक की पढ़ाई समेत अन्य खर्चों की जिम्मेदारी संभाली। पति के इस सहयोग ने शिल्पा को भाई की देखभाल करने की ताकत दी।

आज दूसरी कक्षा में पढ़ रहा है हेत्विक
समय बीतता गया और शिल्पा की मेहनत और परिवार के सहयोग से हेत्विक की जिंदगी आगे बढ़ती रही। आज हेत्विक सीमलवाड़ा के एक स्कूल में दूसरी कक्षा में पढ़ रहा है। उसके लिए शिल्पा सिर्फ बड़ी बहन नहीं बल्कि मां की तरह हैं, जिन्होंने मुश्किल वक्त में उसका हाथ थामा और उसे जिंदगी में आगे बढ़ने का सहारा दिया।रक्षाबंधन पर जब शिल्पा अपने भाई हेत्विक की कलाई पर राखी बांधेंगी तो यह सिर्फ भाई-बहन के रिश्ते का त्योहार नहीं होगा। उस राखी के धागे में करीब सात साल की ममता, त्याग, जिम्मेदारी और एक बहन का मां बनकर निभाया गया फर्ज भी बंधा होगा। शिल्पा की यह कहानी बताती है कि रिश्ते सिर्फ खून से नहीं बल्कि त्याग और जिम्मेदारी निभाने से भी मजबूत होते हैं।

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