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सिरोही-सिरोही के कैलाशनगर, सेऊड़ा और अखापुर गांवों में 20 साल बाद तालाब पूजन का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर सैकड़ों बहनों ने एक साथ तालाब पूजन की परंपरा निभाई, जिसमें हजारों लोग शामिल हुए। इससे तालाब पर मेले जैसा माहौल बन गया।
पूजन के दौरान बहनों ने पानी में उतरकर ‘समंदर हिलोरने’ की परंपरा का निर्वहन किया। भाई-बहनों ने एक-दूसरे कोतालाब का पानी पिलाकर आपसी प्रेम और सुरक्षा का संकल्प लिया।
भाइयों ने अपनी बहनों को चुनड़ी ओढ़ाकर सामग्री से गोद भराई की रस्म पूरी की। यह परंपरा उन बहनों के लिए भी निभाई गई जिनके सगे भाई नहीं थे; ऐसे में अन्य समाज के धर्म भाइयों ने रक्षासूत्र बांधकर उन्हें चुनड़ी ओढ़ाई।तालाब पूजन में कई ऐसी बहनें भी शामिल थीं, जिन्हें धर्म भाइयों ने चुनड़ी ओढ़ाई। भाइयों ने बहनों के उपवास का राशन भी पहुंचाया, जिससे बहनों ने अपना व्रत खोला। कैलाशनगर, सेऊड़ा और अखापुर की 500 से अधिक महिलाओं ने इस आयोजन में भाग लिया।
अलग-अलग गांवों और समाजों की महिलाएं सज-धजकर मंगल गीत गाती हुई तालाब पर पहुंचीं। बहनों ने भाइयों की दीर्घायु की कामना की, जबकि भाइयों ने बहनों की सुरक्षा का संकल्प लिया। इस अवसर पर भाइयों ने बहनों को उपहार भी भेंट किए।


