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खीमाराम मेवाडा
आज का समाज जब भौतिकता की दौड़ में अपनी शांति खो रहा है, तब संतों और गुरुओं के विचार ही हमें मानसिक शांति और जीवन जीने का सही उद्देश्य सिखाते हैं–मंत्री कुमावत
देवस्थान मंत्री जोराराम कुमावत ने पाली में किया संतों का सम्मान
तखतगढ 29 जुलाई (खीमाराम मेवाडा) देवस्थान विभाग द्वारा गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर पूरे प्रदेश में एक अनूठी और भव्य पहल की गई। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में विभाग द्वारा संपूर्ण राजस्थान में 516 पूज्य संतों और महंतों का सम्मान किया गया। इसी राष्ट्र- व्यापी और सांस्कृतिक संरक्षण की कड़ी में पाली जिले में भव्य “गुरु वंदन कार्यक्रम” का आयोजन हुआ, जिसमें देवस्थान विभाग के कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने स्वयं विभिन्न आश्रमों, मठों और मंदिरों का दौरा कर संतों का अभिनंदन किया। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा विशेष रूप से प्रेषित “गुरू वंदन संदेश” संतों को भेंट किया और प्रदेश की सुख-समृद्धि के लिए आशीर्वाद मांगा।
त्यागी आश्रम बूसी में संत पुष्करदास महाराज का अभिनंदन
कार्यक्रम के तहत मंत्री कुमावत बूसी स्थित प्रसिद्ध त्यागी आश्रम पहुंचे। वहां आयोजित संत सम्मान समारोह में उन्होंने परम पूज्य संत श्री 1008 पुष्करदास महाराज का भव्य स्वागत किया। मंत्री ने मुख्यमंत्री की ओर से भेजा गया “गुरू वंदन संदेश”, श्रीफल (नारियल), शाल, दुपट्टा, मिठाई और 2100 रुपए की नकद राशि भेंट कर महाराज श्री का आशीर्वाद लिया।
बालराई के धार्मिक स्थलों पर पहुंचे मंत्री
इसके बाद देवस्थान मंत्री ग्राम पंचायत बालराई पहुंचे। वहां उन्होंने डोवेश्वर महादेव महाराज एवं श्री श्री 1008 कुबाजी महाराज के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर उन्होंने मंदिर के पंडित बालुदास वैष्णव एवं पंडित जोगाराम पुजारी को श्रीफल, शॉल तथा मुख्यमंत्री का शुभकामना-पत्र भेंट कर सम्मानित किया। वहीं, श्री कुमावत ने सुमेरपुर स्थित साकेत आश्रम पहुंचकर परम पूज्य श्री श्री 1008 रामानंद सरस्वती महाराज के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। तत्पश्चात कुमावत ने सुमेरपुर स्थित श्री नीलकंठ महादेव मंदिर में महादेव के दर्शन एवं पूजन का सौभाग्य प्राप्त किया। उन्होंने मंदिर के पुजारी अशोक पंडित को शॉल ओढ़ाकर, श्रीफल एवं मिठाई भेंट कर सम्मान किया।
साथ ही मुख्यमंत्री की ओर से प्रेषित शुभकामना-पत्र प्रदान कर उन्हें गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। सुमेरपुर के कार्यक्रमों में नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष अनोप सिंह राठौड़, जिला उपाध्यक्ष पूनम सिंह परमार, नगर मण्डल अध्यक्ष रविकांत रावल, पूर्व अध्यक्ष महेंद्र माली, सांडेराव मण्डल अध्यक्ष मुकेश मोदी, समाजसेवी नटवर रामीणा, साकेत आश्रम ट्रस्ट के अध्यक्ष मदन सिंह राजपुरोहित, संरक्षक प्रेम सिंह सहित अनेक लोग मौजूद रहे। इसके अलावा इन कार्यक्रमों में किसान केसरी भंवर चौधरी, सेवानिवृत बीईईओ रामलाल कुमावत, खौड़ मण्डल अध्यक्ष हुकम सिंह खरोकड़ा, खुनी गुड़ा के बूथ अध्यक्ष गंगा सिंह, सहायक आयुक्त, जोधपुर ओमप्रकाश पालीवाल, प्रशासक जोगाराम कुमावत, समाजसेवी मुकेश भाटी, युवा मोर्चा के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह मेड़तिया, पूर्व मण्डल अध्यक्ष मुकेश सीरवी, प्रशासक पूनम सिंह राजपुरोहित आदि मौजूद रहे।
देवस्थान मंत्री कुमावत ने सिरोही जिले के सानवाड़ा में श्रीपति धाम नंदन वन पहुंचकर संत सम्मान कार्यक्रम में पूज्य संत श्री गोविंद वल्लभदास महाराज का सम्मान किया। इस दौरान विधायक समाराम गरासिया, जिला अध्यक्ष भाजपा सिरोही श्रीमती रक्षा भंडारी, जिला महामंत्री गणपत सिंह, पूर्व उप जिला प्रमुख नवल किशोर रावल उपस्थित रहे।
भारतीय संस्कृति और संतों के योगदान की सराहना
इस मौके पर मंत्री कुमावत ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोपरि है। संत-महात्मा समाज को सही दिशा दिखाने और नैतिक मूल्यों को बनाए रखने का कार्य करते हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सरकार प्रदेश की सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर को सहेजने के लिए पूरी तरह संकल्पित है, और यह आयोजन इसी सम्मान की भावना का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि भारत भूमि की यह विशेषता रही है कि यहाँ राजा-महाराजाओं के मुकुट भी हमेशा संतों और गुरुओं के चरणों में झुकते आए हैं। हमारे इतिहास में जब-जब समाज का नैतिक पतन हुआ, जब-जब मानवता संकट में आई, तब-तब किसी न किसी संत या गुरु ने आकर समाज को सही दिशा दिखाई है। श्री कुमावत ने कहा कि ‘गुरु वंदन कार्यक्रम’ इसी महान परंपरा का जीवंत उदाहरण है।
गुरु वंदन केवल एक औपचारिकता या सिर झुकाना नहीं है। गुरु वंदन का वास्तविक अर्थ है-गुरु के बताए सत्य, करुणा, सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलने का संकल्प लेना। गुरु वह प्रकाश पुंज है जो हमारे भीतर के अज्ञान रूपी अंधकार को मिटाकर ज्ञान का उजाला भरता है। उन्होंने कहा कि आज का समाज जब भौतिकता की दौड़ में अपनी शांति खो रहा है, तब संतों और गुरुओं के विचार ही हमें मानसिक शांति और जीवन जीने का सही उद्देश्य सिखाते हैं। संत निस्वार्थ भाव से पूरे समाज के कल्याण की कामना करते हैं। वे हमें सिखाते हैं कि परोपकार ही सबसे बड़ा धर्म है।



