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पाली के कोच कच्छवाह से प्रशिक्षित खिलाड़ी अब थाईलैंड में करेगी भारत का प्रतिनिधित्व
वर्तमान में बास्केट बॉल कोच गजेंद्र कच्छवाह यूपी के बुलन्द शहर में तैयार कर रहे बास्केटबॉल प्लेयर्स
पाली के लाल गजेन्द्र कच्छवाह ने बास्केटबॉल कोच के रुप में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई अब भारत का प्रतिनिधित्व थाईलैंड में करेगी कच्छवाह से प्रशिक्षित बास्केटबॉल खिलाड़ी
कई राष्ट्रीय स्तर की बास्केटबॉल प्रतियोगिताओ में पाली का नाम कर चुके है रोशन
पाली। सपने तभी पूरे होते हैं, जब इंसान परिस्थितियों से हार मानने के बजाय उन्हें अपनी ताकत बना ले। पाली शहर के कोच गजेंद्र कच्छवाह की कहानी इसी बात का जीवंत उदाहरण है।
कोच गजेंद्र ने अपने शुरुआती दिनों में पाली के प्रसिद्ध बास्केटबॉल कोच चिड़िया बाबू जी ( स्वर्गीय नज़र मोहम्मद) से प्रशिक्षण लिया। उनका सपना राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर बास्केटबॉल में पहचान बनाने का था। उन्होंने लगातार प्रयास भी किए, लेकिन पारिवारिक परिस्थितियों और आर्थिक जिम्मेदारियों के कारण उनकी पढ़ाई बीच में छूट गई। बास्केटबॉल का सफर भी रुक गया और जीवनयापन के लिए उन्हें नौकरी और व्यवसाय की ओर कदम बढ़ाने पड़े।
समय बीतता गया, लेकिन खेल के प्रति उनका जुनून कभी खत्म नहीं हुआ। वर्षों बाद उन्होंने एक बड़ा फैसला लिया कि यदि खिलाड़ी के रूप में सपना अधूरा रह गया, तो अब कोच बनकर नई पीढ़ी के सपनों को साकार करेंगे। इसी संकल्प के साथ उन्होंने अजमेर जाकर दो वर्षीय पीटीआई (शारीरिक शिक्षा) का प्रशिक्षण पूरा किया। परिवार और दोस्तों के सहयोग से उन्होंने कठिन दौर पार किया और अपनी पढ़ाई सफलतापूर्वक पूरी की।
प्रशिक्षण के बाद उन्हें दिल्ली स्थित ड्रिबल अकादमी में बास्केटबॉल कोच के रूप में कार्य करने का अवसर मिला। वहाँ उन्होंने अनेक खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया और अपने अनुभव को लगातार निखारा।
इसके बाद उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय शुरू हुआ, जब उन्हें उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर स्थित परदादा-परदादी एजुकेशनल सोसायटी में बास्केटबॉल कोच के रूप में नियुक्त किया गया। यह संस्था ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों को निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए पूरे देश में अपनी अलग पहचान रखती है। संस्था छात्राओं की शिक्षा के साथ उनके भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए प्रतिदिन बचत भी करती है, उच्च शिक्षा में सहयोग प्रदान करती है तथा प्रत्येक वर्ष मेधावी छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए विदेश भेजने का अवसर भी देती है।
जब कोच गजेंद्र वहाँ पहुँचे, तब बास्केटबॉल टीम की कोई विशेष पहचान नहीं थी। खेल केवल एक सहायक गतिविधि के रूप में देखा जाता था। लेकिन उन्होंने इसे अपनी चुनौती बना लिया। प्रतिभाशाली छात्राओं का चयन कर उन्हें अनुशासन, तकनीक और आत्मविश्वास के साथ वर्षों तक प्रशिक्षित किया।
उनकी मेहनत का परिणाम धीरे-धीरे सामने आने लगा। टीम ने पहले जिला स्तर, फिर राज्य स्तर पर शानदार प्रदर्शन किया और बाद में राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी अपनी पहचान बनाई। परदादा-परदादी संस्था, जो पहले बास्केटबॉल के क्षेत्र में लगभग अनजान थी, अब देशभर में अपनी उपलब्धियों के लिए पहचानी जाने लगी।
कोच गजेंद्र ने उत्तर प्रदेश बास्केटबॉल टीम का चार बार कोच के रूप में प्रतिनिधित्व किया। इस दौरान उन्होंने भारत के कई राज्यों और शहरों में आयोजित राष्ट्रीय बास्केटबॉल प्रतियोगिताओं में अपनी टीम के साथ भाग लिया और कई चैंपियनशिप अपने नाम कीं।
इस सफर का सबसे गौरवपूर्ण पल तब आया, जब उनकी प्रशिक्षित खिलाड़ी साधना का चयन भारतीय अंडर-18 महिला बास्केटबॉल टीम में हुआ। अब साधना 13 से 19 जुलाई 2026 तक थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में आयोजित फीबा (FIBA) अंडर-18 महिला एशिया कप 2026 में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। यह उपलब्धि केवल एक खिलाड़ी की नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, समर्पण और एक कोच के अटूट विश्वास की जीत है।
कोच गजेंद्र का मानना है कि “पैसा ही सब कुछ नहीं होता। असली खुशी तब मिलती है, जब आपके खिलाड़ी देश के लिए खेलते हैं और आपकी मेहनत उनकी सफलता में दिखाई देती है।”
पाली शहर के लिए यह गर्व का विषय है कि यहाँ से निकले एक युवा ने संघर्षों को अपनी ताकत बनाकर न केवल अपना सपना पूरा किया, बल्कि देश को एक राष्ट्रीय खिलाड़ी भी दिया। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत ईमानदारी से की जाए और धैर्य बनाए रखा जाए, तो परिस्थितियाँ भी सफलता का रास्ता नहीं रोक सकतीं।
आज पूरा पाली शहर कोच गजेंद्र की इस उपलब्धि पर गर्व महसूस कर रहा है। उनकी संघर्ष, समर्पण और सफलता की यह यात्रा हर युवा, हर खिलाड़ी और हर शिक्षक के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

