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पाली-एसीबी की ओर से रिश्वत लेते गिरफ्तार किए गए रोहट बीसीएमओ ऑफिस के संविदाकर्मी अकाउंटेंट देवकीनंदन शर्मा को लेकर नए खुलासे सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि संविदा पर कार्यरत अकाउंटेंट देवकीनंदन शर्मा सालों से बीसीएमओ ऑफिस में ही रह रहा था।
उसने ऑफिस की पहली मंजिल पर ही अपना ठिकाना बना रखा था। इसकी जानकारी होने के बावजूद जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। वहीं एसीबी ने सोमवार शाम आरोपी का मेडिकल करवाने के बाद उसे कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।बीसीएमओ ऑफिस की पहली मंजिल पर बना रखा था ठिकाना
जानकारी के अनुसार संविदा पर कार्यरत अकाउंटेंट देवकीनंदन शर्मा लंबे समय से रोहट बीसीएमओ ऑफिस में ही रह रहा था। उसने ऑफिस की पहली मंजिल पर ही रहने का इंतजाम कर रखा था। विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी होने के बावजूद उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।
बांगड़ हॉस्पिटल में मेडिकल के बाद कोर्ट में किया पेश
एसीबी सोमवार शाम को आरोपी अकाउंटेंट देवकीनंदन शर्मा को पाली के बांगड़ हॉस्पिटल लेकर पहुंची। यहां मेडिकल करवाने के बाद आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट के आदेश पर उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।
20 हजार रुपए की रिश्वत लेते पकड़ा गया था
बता दें कि 21 जून को एसीबी के एडिशनल एसपी देरावरसिंह सोढ़ा के नेतृत्व में टीम ने रोहट में ट्रेप कार्रवाई की थी। इस दौरान परिवादी से 20 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए संविदा पर लगे अकाउंटेंट देवकीनंदन शर्मा को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया था। एसीबी ने रिश्वत की राशि भी बरामद की थी।गाड़ी का भुगतान पास करने के बदले मांगी थी रिश्वत
आरोपी ने परिवादी की बीसीएमओ ऑफिस में लगी गाड़ी का बकाया भुगतान पास करने और आगे भी गाड़ी का टेंडर जारी रखने की एवज में 20 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी। इस पर परिवादी ने एसीबी में शिकायत दी थी।
शिकायत का सत्यापन होने के बाद एसीबी ने रविवार 21 जून को कार्रवाई करते हुए आरोपी को परिवादी से 20 हजार रुपए रिश्वत के रूप में लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया था।
इस पूरे मामले में एसीबी को बीसीएमओ की तलाश है। मामले की जांच जारी है।


