श्रमिको की बेटियों की शादी में महिलाओं ने भरा 13 लाख का मायरा, भर आई आंखें

PALI SIROHI ONLINE

जोधपुर-मान मनुहार और अपणायत के लिए मशहूर जोधपुर शहर में अपणायत का अनूठा नजारा दिखा। जरूरतमंद परिवारों को सहारा देने के उद्देश्य से शहर में महिलाओं के एक ग्रुप ने आर्थिक तौर से कमजोर परिवारों की बेटियों की शादी के लिए मायरा भरने की रस्म निभाई। इसको लेकर कई दिनों से तैयारी चल रही थी। रविवार को जोधपुर के सरदारपुरा स्थित सत्संग भवन में हुए कार्यक्रम में विवाह उत्सव की भांती इस रिवाज को निभाया गया। जिसे देख कर यहां पर मौजूद लोग भी भाव विभोर हो गए। यहां पर 13 बेटियों की शादी के लिए 13 लाख का मायरा भरा गया।

दरअसल जोधपुर के माताजी भक्ति सागर ग्रुप की ओर से जरूरतमंद परिवारों के बेटियों की शादी में सहयोग देने के उद्देश्य से यह कार्यक्रम किया गया। इसके तहत रविवार को 13 बेटियों की शादी के लिए 13 लाख का मायरा भरा गया। इसमें ग्रुप की महिलाओं सहित भामाशाहों ने सहयोग किया।

मायरे की रस्म से पूर्व सभी का तिलक लगाकर स्वागत किया गया। बाद में महिलाओं ने भगवान गणेश, शिव गौरी, सांवरिया सेठ के भजन भी गाए। इसके बाद सभी ने मायरा भरने की रीत निभाई। इस दौरान महिलाओं को सोने की फिणी, कानों के लूंग, चांदी की पायल, बिछिया सहित मिक्सर, प्रेस, बक्सा, पंखा आदि भेंट किया गया।

पाट पर बैठाकर किया सम्मान

पिछले 24 दिनों से ग्रुप की महिलाएं खरीदारी कर रही थीं। आज शाम को सभी ने गौधुली वेला में राम मंदिर में मायरा भरकर उन्हें नए जीवन में प्रवेश के लिए अग्रिम शुभकामनाएं दी। यह सभी बेटियां मजदूर परिवारों की हैं। इनमें से कुछ एमपी, झारखंड की भी हैं। जिनके परिवार के लोग यहां पर दिहाड़ी मजदूरी करते हैं।

कार्यक्रम दोपहर 12 बजे से शुरू हुआ था। शुरुआत में सत्संग भवन में आने वाली सभी 13 बेटियों व उनके परिवारों का सनातन परम्परा अनुसार तिलक, अक्षत लगाकर स्वागत किया गया। बाद में महिलाओं के ग्रुप ने अलग-अलग कार्यक्रम के बाद उन्हें एक पाट पर बिठाकर स्वागत किया। भजनों के बीच उन्हें नथ, बिछिया, पायल आदि देकर चुंदरी ओढ़ाई गई।गोदान के तहत चांदी की गाय, गले का हार दिया गया।

प्रधान संरक्षक गीता माछर ने बताया कि पिछले 11 वर्षों से यह ग्रुप चल रहा है। 1 लड़की की शादी में मायरा भरने की रस्म के साथ आज से 11 साल पहले 2012 में इसकी शुरुआत की गई थी। इसके बाद घर-घर जाकर जरूरतमंद परिवारों की बेटियों की शादी के लिए सहयोग लेते थे। ऐसा 40 बेटियों की शादी तक चला। तब तक ग्रुप का प्रचार इतना हो चुका था कि अब उनके एक बुलावे पर भामाशाह सहयोग करने को तैयार हो जाते हैं।

महिलाओं का ग्रुप

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ग्रप में शामिल सभी महिलाएं हाउस वाइफ हैं। जो किसी भी जरूरतमंद परिवार के बारे में पता चलते पर उनकी सहायता करती हैं। 13 बेटियों के परिवार को यहां पर बुलाया गया। जिनका स्वागत सत्कार करने के साथ ही पूरे परिवार को भोजन करवाया गया। इन्हें गृहस्थी बसाने के लिए जरूरी मिक्सर, बर्तन, पंखे, कपड़ा प्रेस, सामान रखने के लिए बक्शा आदि भेंट किया गया। ग्रुप संरक्षक संतोष राठी ने बताया कि उनका ग्रुप पिछले 11 वर्षों से काम कर रहा है। जिसमें वर्तमान में 200 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। अब तक 110 बेटियों का मायरा भर चुके हैं।

परिवार को मिला सम्बल

उन बेटियों का मायरा भरा गया जिनके परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी बेहतर नही हैं। ऐसे में उनके परिवार के लोग भी काफी खुश नजर आए। यहां पर आई काली देवी ने बताया कि उनकी बेटी की शादी के लिए महिलाओं के ग्रुप ने मायरा भरा है। यह खुशी की बात है। उनके पति कोई मजदूरी नहीं करते हैं जबकि वो दूसरों के घरों में झाड़ू पोछा का काम कर रही है। यहां पर सोने-चांदी से लेकर घर गृहस्थी का सामान भी दिया गया। यह बहुत ही सराहनीय पहल है।

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