जालोर का सुंदेलाव तालाब दुर्दशा का शिकारः 2020 में शुरू हुई थी बोटिंग, 3 साल से बंद; हाल देख शहरवासी निराश

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जालोर-जालोर शहर का एक मात्र ऐतिहासिक सुंदेलाव तालाब दुर्दशा का शिकार है। नगर परिषद भी इसे लेकर उदासीन है। यहां रोजाना शहरवासी मॉर्निंग वॉक पर और शाम को टहलने आते हैं। तालाब की हालत देख वे निराश होते हैं।

2020 में यहां बोटिंग शुरू की गई थी। बोटिंग भी 3 साल से बंद है। तालाब में बारिश के सीजन में अच्छे पानी की आवक हुई है। इसके बाद शहरवासियों को यहां नौकायन फिर से शुरू होने का इंतजार है। 29 नवम्बर 2020 को तत्कालीन जिला कलेक्टर हिमांशु गुप्ता ने तालाब को चंड़ीगढ की सुकना झील और अजमेर के आनासागर की तर्ज पर विकसित करने का प्रयास किया था।

सुंदेलाव तालाब एरिया को विकसित करने के साथ साथ यहां आईलैंड विकसित करने की भी बात थी। इस पर काम भी हुआ था और तालाब पर टूरिस्ट के लिए नौकायन भी शुरू हुआ था। नौकायन करीब 8 माह तक चलने के बाद तालाब में पानी कम होने के कारण बंद कर दिया गया।

इसके बाद 3 साल से लगातार तालाब में पानी की अच्छी आवक होने के बाद भी नगर परिषद नौकायन को शुरू नहीं कर रहा है।

यहां 6.50 लाख की लागत से विकास कार्य किए गए थे। सेल्फी पॉइंट बनाया गया था और ओपन जिम भी लगाई गई थी। फिलहाल पानी की आवक अधिक होने के कारण ये पानी में डूबे हैं। खुली जिम पर नगर परिषद ने 2 लाख और 4.50 लाख की लागत से आई लव जालोर सेल्फी पॉइंट व अन्य काम कराए थे

नगर परिषद की ओर से तालाब के पास 68 लाख की लागत से सीसी रोड बनाई गई लेकिन इसके पास सीवरेज का पानी भरने से यहां बदबू के हालात रहते हैं। यह रोड 900 मीटर लम्बी है। सीवरेज का पानी तालाब में आकर गिर रहा है। ऐसे में यहां से गुजरने वाले लोगों को नाक ढकनी पड़ती है।

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