घर में आग लगने से जिंदा जली मासूमः मां दौड़कर पहुंची तो मिले बेटी के जले हुए अवशेष

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बांसवाड़ा-बांसवाड़ा में शुक्रवार को एक झोपड़ी में भीषण आग लग गई। इसके कारण न सिर्फ पूरी झोपड़ी जलकर खाक हो गई, बल्कि उसमें सो रही 9 महीने की मासूम बच्ची भी जिंदा जल गई। आग इतनी जल्दी फैली कि घर से कुछ दूर कपड़े धोने गई मां भागकर पहुंची, तब तक झोपड़ी पूरी तरह जल चुकी थी। हादसे के दौरान घर में चार बच्चे मौजूद थे। इनमें से तीन ने भागकर जान बचाई।

पुलिस ने बताया- घटना दोपहर 12 बजे मूंगड़ा थाना इलाके के गांव सोमपुर में हुई। गांव में आदिवासियों का टीला है, जहां अधिकतर मकान छप्परपोश और कच्चे बने हैं। आग दोला सारेल (30) की झोंपड़ी में लगी। 9 महीने की बच्ची कल्पना को चारपाई पर छोड़कर मां भुला देवी (27) घर के पास बहने वाली माही नदी पर कपड़े धोने गई थी। इस दौरान बच्ची के पास भुला देवी के तीन बेटे प्रकाश (7), आकाश (5) और मनीष (3) मौजूद थे।

पड़ौसियों ने पानी डाला, लेकिन आग बुझी नहीं पुलिस का कहना है- मां के जाने के बाद अज्ञात कारणों से झोपड़ी में आग लग गई। पड़ोस में भुला देवी के जेठ संतोष का घर था। संतोष चिल्लाता हुआ भागा। भुला देवी भी दौड़ती हुई पहुंची। तीनों बच्चें जान बचाकर बाहर आ चुके थे, जिन्हें मां ने संभाला। मकान कच्चा और लकड़ी का होने के कारण आग तेज फैली। पड़ोसी अपने घरों में पानी के भरे हुए बर्तन लाए और आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन काबू नहीं पाया जा सका। सूचना पर आधे घंटे में पुलिस मौके पर पहुंची। इस दौरान मासूम कल्पना के जले हुए अवशेष मिले

बेटी कल्पना के जले हुए अवशेष मिले भंगड़ा थाने में बच्ची के पिता दोला सारेल ने रिपोर्ट दी। रिपोर्ट में बताया- शुक्रवार को में आंबापुरा थाना इलाके के भूरी घाटी गांव में रिश्तेदार के यहां नोतरे (दावत) के कार्यक्रम में गया हुआ था। पीछे से घर में आग लग गई। बड़े भाई संतोष ने आग लगने की सूचना फोन पर दी। मैं उसी वक्त भूरी घाटी गांव से रवाना हो गया।

उन्होंने बताया- जब मैं सोमपुर में अपने घर पहुंचा तो देखा कि मेरा भाई संतोष, पत्नी भुला देवी और पड़ोसी आग बुझाने की कोशिश कर रहे थे। आग पर काबू नहीं पाया जा सका। घर पूरी तरह से जल कर राख हो चुका था। बेटी कल्पना के शव के अवशेष मिले।

50 हजार और जेवर भी जलकर खाक
दोला सारेल ने बताया- कुछ महीने पहले खेती के काम के लिए पैसों की जरूरत पड़ी तो नोतरे (दावत) का आयोजन किया था। इसमें समाज के लोगों से लगभग 50 हजार रुपए जुटे थे। वह रकम झोंपड़ी में ही थी। इसके अलावा सोने और चांदी का एक जेवर, कपड़े, बिस्तर सब कुछ जल गया। रहने का एक ही ठिकाना था, अब बेघर हो चुका हूं।

भूगड़ा थाना इंचार्ज गणपत सिंह ने बताया- पुलिस शुक्रवार दोपहर 1 बजे के करीब मौके पर पहुंच गई थी। पुलिस ने शव के अवशेष बरामद किए और पोस्टमॉर्टम के लिए घाटोल सीएचसी पहुंचाया। शाम को पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।

नोतरा प्रथा से इकट्ठा हुई थी रकम आदिवासी इलाकों में यह प्रथा है। किसी आदिवासी को खेती या अन्य जरूरत के लिए पैसों की जरूरत होती है तो वह नोतरे यानी दावत का आयोजन करता है। इस दावत में समाज के लोग जुटते हैं और अपनी हैसियत के हिसाब से जरूरतमंद का सहयोग करते हैं। पीड़ित दोला सारेल ने कुछ महीने पहले ही खेती की जरूरत के लिए नोतरा रखा था। इसमें करीब 50 हजार रुपए जुटे थे। आग में यह रकम भी जलकर खाक हो गई।

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