कच्चे केलुपोस मकान में रहने वाले मजदूर के बेटे ने जुडो में जीता गोल्ड मेडल

PALI SIROHI ONLINE

उदयपुर-67वीं नेशनल स्कूल जूड़ो कॉम्पटीशन में उदयपुर के रहने वाले 19 साल के खिलाड़ी मुकेश मीणा ने गोल्ड मैडल जीता है। मुकेश ने महाराष्ट्र के खिलाड़ी को महज 1 मिनट में हराकर फाइनल में जीत हासिल की।

जूड़ो कोच सुशील सेन ने बताया कि मुकेश मीणा 40 किग्रा भार वर्ग में स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले उदयपुर संभाग के पहले आदिवासी खिलाड़ी हैं। इससे पहले मुकेश ने सेमीफाइनल में पंजाब और क्वार्टर फाइनल में उड़ीसा और केरला के खिलाड़ियों को जबर्दस्त मुकाबले में हराया।

खेलो इंडिया स्कीम में हुआ था चयन

अंडर-14 स्कूल नेशनल जूड़ो कॉम्पिटीशन में झारखंड में रजत पदक हासिल किया था। इसके बाद मुकेश का चयन खेलो इंडिया स्कीम के तहत गुजरात के नडियाद साई सेंटर में हुआ, जहां मुकेश को 10 हजार रुपए प्रतिमाह मिलते थे। ओलिंपिक कोच यहां ट्रेनिंग देते थे लेकिन कोरोना काल के बाद मुकेश को उदयपुर लौटना पड़ा।

माता पिता
मुकेश मीणा की कच्ची झुपड़ी

माता-पिता करते है मजदूरी

आदिवासी बहुल इलाके में कच्ची झोपड़ी में रहने वाले मुकेश मीणा के माता होमली बाई और पिता पेमा मीणा मजदूर है। वे शहर से करीब 25 किमी दूर उभयेश्वरजी की पहाड़ियों और जंगल के बीच पिपलिया गांव में रहते हैं। सरकारी सी.सै. स्कूल गौरेला की होनहार प्रतिभा ने इस कॉम्पिटीशन में प्रतिष्ठित

निजी स्कूलों के खिलाड़ियों को मात देकर गोल्ड जीता है। इनके हालात ये हैं कि इनकी कच्ची झोपड़ी तेज आंधी और बारिश में कई बार उजड़ चुकी है लेकिन मुकेश ने हार नहीं मानी। मुकेश के माता-पिता अपने बच्चे को बेहतर शिक्षा और जूड़ों की ट्रेनिंग दिलाने में समक्ष नहीं थे। ऐसे में सरकारी स्कूल के फिजिकल टीचर किशन सोनी ने मुकेश की प्रतिभा को पहचाना और उन्हें रहने-खाने से लेकर ट्रेनिंग दिलाने का फैसला किया। जूड़ो कोच सुशील सेन के निर्देशन में मुकेश मीणा ने नियमित टेनिंग की।

सफाई कर्मचारी की बेटी ने भी नेशनल में जीता कांस्य मुकेश के साथ इसी नेशनल कॉम्पिटिशन में महिला वर्ग सरकारी सी.सै. गर्ल्स रेजीडेंसी स्कूल की छात्रा खुशी पंवार ने भी कांस्य पदक हासिल किया है। खुशी के पिता निजी क्षेत्र में सफाई कर्मचारी हैं। खुशी की बड़ी बहन दिव्या भी नेशनल स्कूली जूड़ो काम्पिटीशन में कांस्य पदक विजेता है।

खुशी ने केवीएस, पंजाब और केरला के खिलाड़ियों को हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया। जहां वे कड़े मुकाबले में दिल्ली की खिलाड़ी से हार गईं। कांस्य पदक के लिए खुशी ने मध्य प्रदेश के खिलाड़ी को हराया। खुशी के पास खेल की बेहतर सुविधा-संसाधन नहीं हैं लेकिन कोच सुशील सेन ने इन्हें निःशुल्क ट्रेनिंग देकर प्रतिभा को निखारने की कोशिश
की।

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