विश्वेंद्र बोले- जाट को मारे जाट या मारे करतार:मुझे ईश्वर ने नहीं मारा; चुनाव जरूर हारा, कमजोर नहीं हुआ हूं

PALI SIROHI ONLINE

भरतपुर-डीग-कुम्हेर विधानसभा सीट पर हार की टीस को पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने सोमवार को जाहिर किया। उन्होंने कहा- एक पुरानी कहावत है, जाट को मारे जाट, या मारे करतार.. मुझे करतार (ईश्वर) ने नहीं मारा। जिनको नहीं मारना चाहिए था, उन्होंने मारा। कोई बड़ी बात नहीं, चुनाव आते जाते हैं। पूर्व मंत्री ने जाट समाज पर ही उन्हें हराने का आरोप लगाया।

पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह भरतपुर में महाराजा सूरजमल बलिदान दिवस के अवसर पर डीग जिले की कामां तहसील में जाट धर्मशाला के उद्घाटन पर बोल रहे थे। विधानसभा चुनाव में उन्हें भाजपा के डॉ. शैलेश सिंह ने 8479 वोटों से हराया था।

महाराजा सूरजमल कभी कोई युद्ध नहीं हारे

पूर्व मंत्री सिंह ने अपने पूर्वज महाराजा सूरजमल को लेकर कहा- महाराजा सूरजमल ने न केवल अपना साम्राज्य बढ़ाया, बल्कि अपने साम्राज्य में खुशहाली लेकर आए। महाराजा सूरजमल ने 80 युद्ध लड़े और सभी युद्धों में वे विजयी रहे। यह एक रिकॉर्ड है। जो ख्याति उन्होंने प्राप्त की, बहुत कम लोगों को हासिल हुई। उन्होंने अंग्रेजों को हराया, मुगलों को हराया और भरतपुर, डीग, कुम्हेर के किले ऐसे बनाए जो हमेशा अजेय रहे।

हम जाट ईर्ष्या की भावना रखते हैं
विधानसभा चुनाव के बाद पहली बार विश्वेंद्र सिंह हार पर खुलकर बोले। उन्होंने कहा- जाट को मारे जाट, या मारे करतार। यह कटु सत्य है। मुझे सभी कौमों ने वोट दिया। मैं जाटव समाज का धन्यवाद देना चाहता हूं, जिन्होंने मुझे 80 से 90 प्रतिशत वोट दिए। यह उम्मीद से बाहर है। ऐसा आज तक नहीं हुआ।

लेकिन हमारे जाटों में कमी है कि हम ईर्ष्या की भावना रखते हैं। अपने दुख से दुखी नहीं है, दूसरे के सुख से दुखी है। इसको बदलो, प्रतिस्पर्धा लाओ। जब तक ये नहीं होगा, हम आगे नहीं बढ़ेंगे। कभी आपको मेरी जरूरत पड़े तो मेरे पास आओ। चुनाव जरूर हार गया हूं, लेकिन कमजोर नहीं हुआ हूं।

जाट समाज के कार्यक्रम में पहुच पूर्व मंत्री विश्वद्र सिंह लागा का आभवादन करते हुए।
भरतपुर-धौलपुर के जाटों को केंद्र में मिले आरक्षण पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने कहा- OBC में भरतपुर और धौलपुर के जाट शामिल नहीं थे। मैंने और जनता ने पिछले बीजेपी शासन में संघर्ष किया था। मैं मंत्री भी रहा, लेकिन रेल रोकने का केस आज भी मुझ पर चल रहा है। अब हम चाहते हैं कि हमें केंद्र में आरक्षण मिले। केंद्र का तर्क है कि धौलपुर और भरतपुर के शासक जाट समाज से थे। मेरा सवाल है- जाट शासक थे तो क्या पूरी जनता धनवान थी?

विश्वेंद्र की हार ने चौंकाया था
इस बार विधानसभा चुनाव में विश्वेंद्र सिंह की हार ने सभी को चौंकाया था। डीग-कुम्हेर विधानसभा सीट पर उन्हें बीजेपी प्रत्याशी डॉ. शैलेश सिंह के हाथों हार मिली। शैलेश सिंह को 89063 तो विश्वेंद्र सिंह को 81168 वोट मिले थे।

शैलेश सिंह साल 2018 में भी बीजेपी के टिकट पर विश्वेंद्र सिंह के सामने मैदान में थे, लेकिन तब विश्वेंद्र सिंह ने उन्हें 8 हजार वोटों से हराया था। डीग कुम्हेर से भाजपा विधायक डॉ. शैलेश सिंह MBBS हैं। दौसा में उनका इंजीनियरिंग कॉलेज और भरतपुर में नर्सिंग कॉलेज है। शैलेश के पिता स्व. दिगंबर सिंह ने भी 2008 में विश्वेंद्र को चुनाव हराया था।

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