जवाई नदी में पानी क्यों नहीं छोड़ा जा रहा: हाईकोर्ट

PALI SIROHI ONLINE

खीमाराम मेवाड़ा तखतगढ़

पाली/जोधपुर. राजस्थान हाईकोर्ट ने जवाई नदी के किनारे सैकड़ों गांवों में जल संकट को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए केंद्र व राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव और न्यायाधीश राजेंद्र प्रकाश सोनी की खंडपीठ ने राजस्थान किसान संघर्ष समिति की ओर से दायर जनहित याचिका की सुनवाई के बाद कहा कि अक्टूबर 2022 में प्रस्ताव लेने के बावजूद कोई कदम नहीं उठाया गया है।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अंकुर माथुर ने जालोर जिले के संबंध में लंबे समय से चले आ रहे जवाई बांध जल विवाद का ब्यौरा दिया। उन्होंने कहा कि लूनी नदी की एक सहायक नदी पर 1957 में बांध के निर्माण के बाद से जालोर जिले में किसानों के लिए जल आवंटन से संबंधित एक ज्वलंत समस्या बनी हुई है। नदी किनारे बसे जालोर के गांवों में बांध का पानी नहीं छोड़ने की स्थिति में भूजल रीत रहा है। इसके अलावा पर्यावरण पर कई प्रतिकूल परिणाम नजर आने लगे हैं।

जवाई बांध से पानी न छोड़े जाने के कारण 2018 से 2021 तक जल स्तर में काफी कमी आई है, जिससे आसपास के गांवों में सूखे की स्थिति पैदा हो गई है। माथुर ने तर्क दिया कि जवाई बांध के निर्माण ने जालोर के लोगों को असंगत रूप से प्रभावित किया है, जो भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत, पानी पर उनके अधिकार का उल्लंघन है। उन्होंने सुरक्षित पानी तक पहुंच के संवैधानिक अधिकार पर जोर देते हुए राज्य सरकार को क्षेत्र में प्रभावित लोगों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करने का निर्देश देने का आग्रह किया।

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