जवाई नदी में प्राकृतिक बहाव को बहाल करने की याचिकाः हाईकोर्ट में मंजूर, 19 दिसंबर तक मांगा जवाब

PALI SIROHI ONLINE

खीमाराम मेवाड़ा तखतगढ़

jalore-जवाई नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बहाल करने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाई गई, जिसको लेकर हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है।

राजस्थान किसान संघर्ष समिति जालोर के अध्यक्ष बद्रीदान नरपुरा की तरफ से 14 दिसंबर को दाखिल याचिका पर मुख्य न्यायाधीश राजेन्द्र प्रकाश सोनी, अतिरिक्त मुख्य न्यायाधीश मानिन्द्र मोहन श्रीवास्तव ने जलशक्ति मंत्रालय सचिव मुख्य सचिव, सचिव जल संसाधन विभाग जयपुर और सचिव जन स्वास्थ्य अभियांत्रिक विभाग जयपुर से एएजी पंकज शर्मा के मार्फत 19 दिसंबर तक जवाब मांगा है।

एकमात्र जीवनदायिनी नदी बता याचिका की थी दाखिल बद्रीदान नरपुरा ने बताया की आरटीआई के तहत मिले सबूत से यह जानकारी मिलती है कि जवाई नदी जालोर क्षेत्र की एकमात्र जीवनदायिनी नदी है। कई सदियों से नदी के पानी का उपयोग पीने और खेती के लिए किया जाता रहा है। लेकिन 1957 में जवाई नदी पर जवाई बांध के निर्माण के बाद से वर्ष 2022 तक 66 सालों में केवल 8 बार ही बांध ओवरफ्लो हुआ है। जब भी यह ओवरफ्लो हुआ तब-तब बाढ़ की स्थिति बनी। जिससे जानमाल की क्षति हुई और कृषि भूमि का कटाव हुआ। बाकी 58 सालों में नदी के बहाव क्षेत्र में जवाई बांध के कारण मानसून में पानी की आवक नहीं होने से धीरे-धीरे बेरा बस्ती का जलस्तर रसातल में चला गया है। जालोर में सप्लाई होने वाले पानी में आज भी फ्लोराइड की मात्रा बहुत ज्यादा है। बेरा बस्ती में रहने वाले हजारों लोगों आज भी पेयजल के लिए टैंकरों पर निर्भर है। बांध के पानी पर 1/2 हिस्से जालोर वासियों का प्राकृतिक हक हैं।

गृह मंत्री ने जवाई को पुन जीवत करने का किया था वादा राजस्थान में 25 नवम्बर को विधानसभा चुनावों के दौरान सायला में एक चुनावी सभा में आए गृह मंत्री अमितशाह ने राजस्थान में भाजपा की सरकार आने पर जवाई नदी को पुनर्जीवित करने का आश्वासन दिया था।

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