महंत के शिष्य की हत्या, मंदिर के पीछे मिली लाश: डेढ़ साल से गुरु की सेवा में लगे थे

PALI SIROHI ONLINE

केकड़ी-बीएससी-बीएड की पढ़ाई छोड़ कर संत की सेवा में लगे शिष्य की हत्या कर शव मंदिर के पीछे बने तालाब (कुंड) में फेंक दिया गया। शुक्रवार 15 दिसंबर को डेडबॉडी कुंड में मिली। युवक 13 दिसंबर से लापता था। 14 दिसंबर को मंदिर के महंत ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मामला केकड़ी के सरवाड़ इलाके का है

14 को मंदिर महंत ने दर्ज करवाई थी FIR

सरवाड़ थाने के जांच अधिकारी दीवान मोहनलाल चौधरी ने बताया- 14 दिसम्बर को कालाबड़ मन्दिर के महंत बाबा बालकदास महाराज ने अपने शिष्य श्यामसुंदर दाधीच (22) की गुमशुदगी की रिपोर्ट सरवाड़ थाने में दर्ज करवाई थी। सरवाड़ निवासी श्यामसुंदर पुत्र रामस्वरूप शर्मा कालाबड़ स्थित हनुमान मंदिर में महंत बाबा बालकदास महाराज के पास रह रहा था। वह 13 दिसम्बर की सुबह 11 बजे से ही लापता था। शुक्रवार की शाम को एक चरवाहे ने हनुमान मंदिर के पीछे बने कुंड में शव पड़े होने की जानकारी दी। कुंड में पानी ज्यादा होने से मोटर लगाकर पानी को बाहर खींचा गया। इसके बाद शव को बाहर निकाल कर सरवाड़ स्थित राजकीय अस्पताल की मॉर्क्युरी में रखवाया गया।

परिवार वालों ने जताई हत्या की आशंका

शुक्रवार को श्यामसुंदर के परिजन और ब्राह्मण समाज ने मॉर्च्यूरी पर हंगामा खड़ा कर दिया था। समाज के लोगों व परिजनों ने हत्या की आशंका जताते हुए मामले की निष्पक्ष जांच करवाने की मांग की थी। आरोप लगाया कि श्याम सुंदर के 13 दिसंबर को लापता होने के बाद भी बालकदास महाराज ने परिजनों को कोई सूचना नहीं दी। गांव के लोगों से परिवार वालों को शव मिलने की सूचना मिली थी। उन्होंने मांगे माने जाने तक शव का पोस्टमॉर्टम कराने से इनकार कर दिया था।

विधायक ने की सीएम से बात

शनिवार दोपहर करीब 3 बजे विधायक शत्रुघ्न गौतम मौके पर पहुंचे और ब्राह्मण समाज के लोगों से चर्चा की। विधायक ने मौके से ही मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से फोन पर बात की। मामले में निष्पक्ष जांच करने सहित विभिन्न मांगों को लेकर अवगत कराया। विधायक के आश्वासन के बाद ब्राह्मण समाज के लोग माने और मेडिकल बोर्ड से शाम 5 बजे पोस्टमॉर्टम कराया गया। इसके बाद शव परिवार वालों को सौंप दिया गया।

भक्ति में मन लगा तो छोड़ दी थी पढाई

परिजनों ने बताया कि श्यामसुंदर बाबा बालक दास जी महाराज के शिष्य बनने से पहले बीएससी-बीएड कर रहे थे। पढ़ाई में काफी होशियार थे। वो प्रभु की भक्ति में लीन हो गए और पढ़ाई छोड़ दी। इसी के साथ वो महंत बाबा बालकदास महाराज के शिष्य बन गए थे। वो डेढ़ साल से मंदिर में रहकर सेवा-पूजा कर रहे थे।

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