क्रिकेट की दुनिया में जाना चाहती थी मेंगलवा की हर्षा, अब गुजरात में दीक्षा ग्रहण करेगी

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मैगलवा की 25 वर्षीय हर्षा 6 दिसंबर को सांसारिक जीवन छोड़ संयम पथ अंगीकार करने जा रही हैं। इसे लेकर गुरुवार को मेंगलवा कस्बे में वर्षीदान वरघोड़े का आयोजन किया। हर्षा छोटी ही उम्र में क्रिकेट खेलने का शौक रखती थी।

जैन संत-साध्वियों के साथ लंबे समय तक रहने के बाद उन्होंने संयम पथ अंगीकार करने का फैसला लिया। उनके बाद हर्षा के पिता होराचन्द जैन ने बेटी के फैसले को समर्थन दिया। मुमुक्षु हर्षा 6 दिसम्बर को गुजरात के उमरगांव में जैनाचार्य यशोवर्म सूरीश्वर महाराज एवं साधु-साध्वी की निश्रा में दीक्षा ग्रहण करेंगी।

बीबीएम कर चुकी हर्षा, क्रिकेट में भी उनकी रुचि

हर्षा बीबीएम कोर्स तक की पढ़ाई कर चुकी हैं। वो क्रिकेटर भी है। हर्षा के भाई तरुण जैन ने बताया कि हर्षा को क्रिकेट में बहुत रूचि थी। साथ ही क्रिकेट खेलती रहती एवं एक क्रिकेटर बनने का सपना था। परंतु वो तीन साल पहले दीक्षा लेने की जिद करने लगी। उसके बाद परिवार उसकी बात पर राजी हो गए। हर्षा जैन समाज की साध्वियों के साथ भक्ति कर चुकी हैं। मैसूर में रहता है हर्षा का परिवार मूलतः मेंगलवा निवासी हर्षा परिवार के साथ मैसूर (कर्नाटक) में रहता है। इसके पिता हीराचंद जैन किराणा के बड़े व्यापारी है। इनकी पढ़ाई वहां पर हुई थी।

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