परिजन बोले लड़का हुआ था बदलकर दी लड़की:अस्पताल में किया हंगामा,

PALI SIROHI ONLINE

भीलवाड़ा-शहर के महात्मा गांधी चिकित्सालय में बच्चा बदलने की घटना पर माहौल गरमा गया। परिजनों की चिकित्साकर्मियों व स्टॉफ से बहसबाजी के बाद गहमागहमी हो गई। मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों ने परिजनों को समझा कर मामला शांत करवाया।

जानकारी के मुताबिक महात्मा गांधी चिकित्सालय के मातृ शिशु वार्ड में गंगापुर से मो हनीफ पठान की पत्नी शबनम ने शुक्रवार देर रात लड़के को जन्म दिया। शनिवार दोपहर बाद लड़के की जगह लड़की नज़र आने पर परिजनों ने हंगामा खड़ा कर दिया। परिजनों के मुताबिक उनके हुई संतान लड़का था लेकिन शनिवार दोपहर बाद लघु शंका के दौरान कपड़े बदलने पर उन्हें लड़की होने का पता चला। परिजनों का आरोप है कि उन्हें लड़का होने की जानकारी दी, हाथ पर लगे टैग में भी लड़का लिखा था, रजिस्टर में भी कांट छांट की गई है। पहले उनके लड़का लिखा और बाद में उसमे कटिंग कर गई। परिजनों के मुताबिक नवजात की बुआ ने अच्छे से देखा था और उनके लड़का ही हुआ था लेकिन दोपहर बाद लड़के के स्थान पर लड़की देखकर सब चौंक गए, जब इसकी शिकायत चिकित्सालय प्रशासन को की गई तो उन्होंने उल्टा परिजनों को खरी-खोटी सुना डाली।

परिजनों ने चिकित्साकर्मियों पर लापरवाही और दुर्व्यवहार का भी आरोप लगाया। घटना की जानकारी अन्य रिश्तेदारों को मिलने पर उन्होंने चिकित्सालय परिसर में हंगामा मचा दिया। सूचना पर भीमगंज थाना पुलिस, थाना प्रभारी आशुतोष पांडेय, एएसआई कैलाश चन्द्र खटीक, चौकी प्रभारी अनवर हुसैन मय जाप्ते चिकित्सालय पहुंची और परिजनों से समझाइश की। परिजनों की रिपोर्ट पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच प्रारंभ की।

पहले भी हुई हैं बच्चा बदलने की घटनाएं

इसी वर्ष 25 जनवरी को धुंवाला निवासी शैल कुमारी ने बच्चा बदलने का आरोप लागाया था, लेकिन बाद में पता चला कि उस दिन कोई मेल चाइल्ड हुआ ही नहीं। इससे पूर्व 17 नवम्बर 22 में भी हॉस्पिटल कर्मियों की लापरवाही से बच्चों की अदला बदली हो गई थी। पुर के दिनेश विश्नोई की पत्नी टीना का बच्चा दीपक सिंधी की पत्नी हिमिशा के बच्चे के साथ बदल गया था। बाद में चिकित्सालय प्रशासन ने सफ़ाई देते हुए डीएनए करवाने की बात कही थी।

किसी लड़के की डिलीवरी ही नहीं हुई

महात्मा गांधी हॉस्पिटल के पीएमओ अरुण गौड़ ने बताया कि शुक्रवार रात चिकित्सालय में किसी लड़के की डिलीवरी ही नहीं हुई, ऐसे में लड़के से लड़की का बदलना नहीं हो सकता। नवजात परिजनों के पास ही था तो कैसे उसकी बदली होती । रजिस्टर में लिखने के दौरान स्टाफ़ से कुछ चूक हुई है, जिसकी लापरवाही रही उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई होगी। परिजनों को ग़लतफ़हमी हुई है, परिजन कहेंगे तो डीएनए जांच करवाएंगे।

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