पाली-क्रोध के सौ नुकसान हैं, पर क्षमा केहजार फायदे हैं – राष्ट्र संत ललितप्रभजी

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दीपक सारसवत


क्रोध के सौ नुकसान हैं, पर क्षमा के हजार फायदे हैं – राष्ट्र संत ललितप्रभजी
अनुव्रत नगर मैदान में हजारों लोगों ने लिया गुस्सा नहीं करने का संकल्प, मंगलवार को प्रवचन माला का होगा समापन,
पाली, 12 जून। राष्ट्रसंत श्री ललितप्रभ जी ने कहा कि अगर आप 1 घंटे की खुशी चाहते हैं तो जहाँ बैठे हैं वहाँ झपकी ले लीजिए, 1 दिन की खुशी चाहते हैं तो शहर में घूम आइए, 1 सप्ताह की खुशी चाहते हैं तो किसी हिल स्टेशन या तीर्थ पर चले जाइए, 1 महीने की खुशी चाहते हैं तो किसी सुंदर लड़की से शादी कर लीजिए, 1 साल की खुशी चाहते हैं तो किसी बड़े पैसे वाले व्यक्ति के गोद चले जाइए, पर आप जीवन भर खुश रहना चाहते हैं तो अपने स्वभाव को शांत और मधुर बना लीजिए। जैसा होगा हमारा नेचर वैसा ही बनेगा हमारा फ्यूचर। जैसा हम रखेंगे अपना स्वभाव, वैसा ही पड़ेगा दूसरों पर प्रभाव। जो लोग क्रोध के वातावरण में भी शांत रहते हैं वे हीरे की तरह होते हैं, पर जो विपरीत वातावरण आते ही उग्र हो जाते हैं वे काँच के टुकड़े जितनी औकात के बन जाते हैं।
संत प्रवर सोमवार को श्री जैन श्वे. खरतरगच्छ श्री संघ द्वारा अणुव्रत नगर मैदान में आयोजित पांच दिवसीय जीने की कला प्रवचन माला के चौथे दिन हजारों श्रद्धालु भाई बहनों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि क्रोध हमारा सबसे बड़ा दुश्मन है जो 1 मिनट के लिए आता है और जिंदगी भर मेहनत कर बनाए गए करियर को चौपट कर जाता है। अगर हम अपने जीवन को जीते जी स्वर्ग बनाना चाहते हैं तो हमें गुस्से को जीतना होगा। गुस्से के चलते अमीरों की कोठियाँ भी नरक की आग उगलना शुरू कर देती हैं, वहीं मिठास से जीने वाले लोगों को कुटियाओं में भी स्वर्ग के सुख नसीब हो जाते हैं।
गुस्से को जीतने की प्रेरणा देते हुए संतप्रवर ने कहा कि गलती हो जाए तो झुक जाइए और गुस्सा आए तो रुक जाइए, आप सदा लाभ में रहेंगे। वैसे हममें से हर किसी को जैन धर्म की एक डिग्री अवश्य पास कर लेनी चाहिए वह है : एम. डी. अर्थात मिच्छामि दुक्कड़म्। जो लोग गलती होते ही माफी माँग लेते हैं और दूसरों के द्वारा गलती होने पर माफ कर देते हैं वे जीते जागते धरती के देवता हुआ करते हैं। अगर हम किसी की सोने से पहले दो गलतियों को माफ कर देंगे तो भगवान सुबह उठने से पहले हमारी सौ गलतियों को माफ कर देगा। जो गलती करके सुधर जाए उसे इंसान कहते हैं, जो गलती पर गलती करे उसे नादान कहते हैं, जो उससे ज्यादा गलतियाँ करे उसे शैतान कहते हैं, जो उससे भी ज्यादा गलतियाँ करें उसे पाकिस्तान कहते हैं, पर जो उसकी भी गलतियों को माफ कर दे उसे ही शेरे दिल हिंदुस्तान कहते हैं। याद रखें, जो काम रुमाल से निपट जाए उसके लिए रिवाल्वर मत चलाइए और जो काम प्रेम से हो जाए उसके लिए गुस्सा मत कीजिए।
गुस्से को जीतने के टिप्स देते हुए संत प्रवर ने कहा कि विरोध के वातावरण में भी मुस्कान को तवज्जो दीजिए, गुस्से को जीतने के लिए क्रोध के वातावरण से दूर रहिए, मौन का अभ्यास बढ़ाइए, सकारात्मक व्यवहार कीजिए, विनोदी स्वभाव के मालिक बनिए, सप्ताह में 1 दिन क्रोध का उपवास अवश्य कीजिए। अगर आप शांति के वातावरण में क्रोध करते हैं तो दुनिया की नजर में आप उग्रवादी कहलाएंगे वहीं यदि क्रोध के वातावरण में भी आप शांत रहेंगे तो किसी देवदूत की तरह पहचाने जाएंगे।
प्रवचन से प्रभावित होकर हजारों श्रद्धालु भाई बहनों ने गुस्सा नहीं करने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर मुनि शांतिप्रिय सागर जी ने कहा कि हमेशा मुस्कुराते हुए जिएँ। मुस्कुराता हुआ चेहरा दुनिया का सबसे खूबसूरत चेहरा होता है। काला व्यक्ति भी जब मुस्कुराता है तो बहुत सुंदर लगता है, और गौरा अगर मुँह लटकाकर बैठ जाए तो बहुत भद्दा दिखने लग जाता है। इसलिए हर दिन की शुरुआत मुस्कुराते हुए करें। हमारे जेब में भले ही न हो मोबाइल पर चेहरे पर सदा रहे स्माइल। उदाहरण से सीख देते हुए संतप्रवर ने कहा कि जब हम फोटोग्राफर के सामने पांच सैकंड मुस्कुराते हैं तो हमारा फोटो सुंदर आता है और हम अगर हर पल मुस्कुराएंगे तो सोचो हमारी जिंदगी कितनी सुंदर बन जाएगी।
कार्यक्रम में साध्वी श्री कल्पलता श्री महाराज आदि साध्वी मंडल ने अपनी पावन निश्रा प्रदान की।
सभा का शुभारंभ लाभार्थी श्री जैन श्वेतांबर खरतर संघ, पाली के अध्यक्ष राज लुणिया, संघ उपाध्यक्ष मोतीलाल कटारिया,सचिव सुनील कटारिया, कोषाध्यक्ष जिनेंद्र गडावत, इंद्रचंद बोहरा, ललित धारीवाल, नरेंद्र कुमार कांकलिया, संजय बलाई, जयकुमार जिंदाणी, जसराज गोलेछा, जितेंद्र बलई, अभय कटारिया, दीपक मेहता, ज्ञानचंद रेड, सुरेश लोढ़ा ने दीप प्रज्जवलित कर किया। कार्यक्रम में ओसवाल सिंह सभा जोधपुर के अध्यक्ष केएन भंडारी, किशन गर्ग और धनपत ओस्तवाल विशेष रूप से उपस्थित थे।
इस अवसर पर कविराज सुख सिंह ने भी गुरु भक्ति में अपनी प्रस्तुति दी।
मंगलवार को होंगे अंतिम प्रवचन-संत प्रवर मंगलवार को अनवरत नगर मैदान में सुबह 8:45 बजे जीने की कला पर अंतिम प्रवचन देंगे ।

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