मौसम की मार: पकी फसल पर बारिश का असर, प्रति क्विंटल तक गिर गए भाव

PALI SIROHI ONLINE

शिवगंज-उपखंड क्षेत्र के किसानों को इस बार रायड़ा, गेहूं और अरंडी की उपज अच्छी मिलने की उम्मीद जगी थी, लेकिन फसल पकने के पहले ही उस पर पाला गिरने, बारिश और मोयला कीट ने किसानों की उपज पहले ही आधी कर दी थी। ऐसे में अब फसल पकने के बाद रायड़ा और गेहूं के भावों में आई जबरदस्त गिरावट ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।

कृषि उपज मंडी में रायडा व गेहूं की आवक शुरू होने के साथ ही इनके भावों में बड़ी गिरावट आई है। जनवरी व फरवरी में जहां रायड़ा के भाव प्रति क्विंटल 5400 रुपए से 5970 रुपए और गेहूं के भाव प्रति क्विंटल 2600 रुपए से 2800 रुपए तक थे।

फसल बाजार में आने के साथ ही भावों में जबरदस्त मंदी आकर रायडा के भाव प्रति क्विंटल 4900 रुपए से 5100 रुपए और गेहूं के भाव प्रति क्विंटल 2070 रुपए से 2200 रुपए तक गिर गए हैं। भावों में गिरावट आने से किसानों को तगड़ा झटका लगा है। बारिश की आशंका को लेकर किसान अब खेत खलियान में कटी हुई रायड़ा, गेहूं सहित अन्य फसलों की उपज लेने में जुटे हुए हैं।

बारिश और पाले ने फसल कर दी आधी

किसानों ने बताया कि इस बार कृषि कुओं में पानी पर्याप्त होने से खेतों की सिंचाई भी निर्धारित समय पर की गई थी। जिससे रबी की फसल अच्छी होने के साथ इसकी उपज भी पर्याप्त मिलने की उम्मीद जगी थी। पाले बारिश और मोयला कीट ने फसल की उपज पानी फेर दिया। रायडा फसल की उपज ही कम नहीं मिल रही है बल्कि, मंडी में उपज के भाव भी कम मिल रहे हैं।

किसान मांगीलाल ने बताया कि इस बार 6 बीघा में रायडा फसल बोई गई थी, जिसकी कटाई कर हाल ही में उपज ली गई तो सिर्फ करीब 12 बोरी ही उपज हाथ लगी है। यानी प्रति बीघा 2 बोरी ही उपज हो पाई है। जबकि अच्छी फसल होने से इस बार उन्हें कम से कम 24 बोरी उपज मिलने की संभावना थी।

चांदना के किसानों ने बताया कि रायडा फसल की उपज कम मिलने की वजह पाला गिरने, मोयला कीट उत्पन्न होने व दो बार बारिश होने से फसल खराब होना है। अगर फसल खराब नहीं होती तो रायडा फसल की उपज प्रति बीघा 4 बोरी से अधिक ही मिलती है।

लागत मिलना भी मुश्किल हुआ

किसानों की माने तो रायडा की उपज कम मिलने और भाव में गिरावट आने व फसल की सिंचाई, खाद बीज, खडाई, फसल कटाई, बुवाई, उपज लेने की मजदूरी राशि भी इस बार अधिक खर्च हुई है। ऐसे में रायड़ा उपज से जो आवक होगी, वह पूरी आवक खर्चे में ही पूरी होने की संभावना है।

भारतीय किसान संघ के तहसील अध्यक्ष मनोहर सिंह राणावत ने बताया कि रायडा फसल में हुए नुकसान की भरपाई के लिए राज्य सरकार को मुआवजा देना चाहिए, अगर मुआवजा नहीं दिया गया तो किसानों की माली हालत और खराब होने की आशंका है।

क्षेत्र में पिछले 2 दिन से आकाश में घने काले बादल छाए रहने से बारिश होने की आशंका को लेकर किसानों ने अपने खेत खलियान में कटी हुई रायड़ा, गेहूं फसल की उपज लेने की तैयारियां तेज कर दी है। कई किसानों के खलियानों में तो रात में भी थ्रेसर चलाए जा रहे हैं।

कई खेतों में किसान गेहूं की फसल को अभी भी पूरी काट ही नहीं पाए हैं। ऐसे में अगर अगले एक दो दिनों में थोड़ी बहुत भी बारिश को गई तो किसान का दाना फिर पानी में चला जाएगा।

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