माउन्ट आबु- एसडीएम ऑफिस के बाहार 1 दिन का धरना देकर मॉनिटरिंग कमेटी को भंग करने की मांग

PALI SIROHI ONLINE

माउंट आबू-माउंट आबू शहर में मंगलवार को राजपूत समाज के 16 गांवों के महिला और पुरुष जुटे। उन्होंने एसडीएम ऑफिस के बाहर एक दिन का सांकेतिक धरना देकर मॉनिटरिंग कमेटी को भंग करने, कमेटी भंग नहीं होने तक उसके काम करने पर रोक लगाने और नया नाका नहीं लगाने की मांग की है। धरने का आबू संघर्ष समिति की ओर से भी समर्थन किया गया।

विधायक समाराम गरासिया ने कहा कि नगर पालिका में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है। माउंट आबू शहर का आम नागरिक अगर सीमेंट और बजरी की एक बोरी छुपाकर ले आता है तो उसपर भारी जुर्माना लगता है। कभी-कभी तो गाड़ी सीज भी हो जाती है। इससे ज्यादा दुर्भाग्य माउंट आबू के लिए नहीं हो सकता। बिल्डिंग बायलॉज की घोषणा कांग्रेस सरकार में हुई, लेकिन धरातल स्तर पर कार्य नहीं हुए। हम सभी को इसी बात पर अड़े रहना है की मॉनिटरिंग कमेटी का अध्यक्ष डिविजन लेवल का कमिश्नर हो, जो सभी जानकारी रखता हो। शहर में कई ऐसी बिल्डिंग हैं, जो जर्जर अवस्था में हैं और कभी भी कोई दुर्घटना हो सकती है।

संघर्ष समिति के अध्यक्ष प्रवीण सिंह परमार ने कहा कि हमें ऐसा लग रहा है कि माउंट आबू राजस्थान में नहीं है। यहां हर आम नागरिक मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। हमें या तो माउंट से भेज दिया जाए या माउंट आबू को गुजरात में सम्मिलित कर दिया जाए। नए नियम लगाकर मूल निवासियों को राहत से वंचित किया। रसूखदार के कार्य हो रहे हैं और आम जनता लगातार परेशान हो रही है। घर मे बाथरूम बनाने की स्वीकृति नहीं मिल पा रही। नरपत दान चारण ने कहा हमारा यह संघर्ष सफल होता है तो न केवल राजपूत समाज बल्कि मूल निवासियों को अपना हक मिलेगा।

भास्कर अग्रवाल ने कहा कि आबू के मूल निवासियों को सिर्फ मूलभूत सुविधा चाहिए। उन्हें होटल्स बनाकर बेचना नहीं है। यह संघर्ष मूलभूत सुविधाओं को लेकर है। यहां हर मूल निवासियों को उनका हक मिलना चाहिए। ओरिया के उपसरपंच तरुण सिंह ने कहा कि हमारे गांव में कहीं ऐसे घर है, जहां अभी भी लोग मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। ग्रामवासी मूलभूत सुविधाओं से वंचित होकर आज भी परेशानियां उठा रहे हैं। हमारे ग्रामवासी बाथरूम और शौचालय से आज भी वंचित हैं। इस मौके पर आबू पिंडवाड़ा विधायक समाराम गरासिया, ओरिया उपसरपंच तरुण सिंह, महेंद्र सिंह परमार, प्रवीण सिंह परमार, बाबू सिंह परमार, देवी सिंह देवल, देवी सिंह, नारायण सिंह, अजित सिंह, नरपत चारण, अजित सिंह, मंगल सिंह, देवी सिंह, संतोष कंवर, अलका कालमा, मांगीलाल काबरा, सुनील आचार्य, विकास अग्रवाल, विजय लालवानी, सोहल गांव राजपूत व महिलाओं व पुरुषों की भीड़ दिखाई दी।

मॉनिटरिंग कमेटी के बाद मिली कामों को गति मॉनिटरिंग कमेटी के पूर्व सदस्य और वार्ड पार्षद सौरभ गांगड़िया ने एक वीडियो जारी कर मॉनिटरिंग कमेटी का पक्ष लिया। उन्होंने कहा कि पूर्व में मॉनिटरिंग कमेटी नहीं थी, तब सभी कार्य अटके हुए थे और कोई भी अधिकारी सुनने को तैयार नहीं था। जब भी प्रपोजल तैयार कर अधिकारियों से मिलने जाते तब अधिकारियों की ओर से कहा जाता था कि मॉनिटरिंग कमेटी ही निर्णय करेगी। लंबे समय के बाद मॉनिटरिंग कमेटी बनी है। इसके बाद ही शहर में निर्माण कार्यों में को गति मिली है। उन्होंने कहा कि मॉनिटरिंग कमेटी भंग करने से कोई समाधान नहीं होगा, क्योंकि अगर मॉनिटरिंग कमेटी भंग होती है तो जो कार्य अग्रसर हो रहे हैं वह कार्य भी रूक जाएंगे।अब मास्टर प्लान को संशोधित कर लागू करना है, यह कार्य अगर कोई करेगा तो वह मॉनिटरिंग कमेटी है। यह एनजीटी और कोर्ट ने कहा है। अगर मॉनिटरिंग कमेटी नहीं रही तो यह कार्य कौन करेगा। जब तक मास्टर प्लान मॉडिफाई होकर लागू नहीं होगा तब तक दूसरी विकास की गतिविधि रुकेगी एवं विकास के कार्य रुक जाएंगे। कमेटी भंग करने की मांग से बेहतर हमारे यहां मांग होनी चाहिए कि विशेष आमंत्रित के तौर पर हमारे समाज के कुछ सदस्य उस कमेटी में जुड़ने चाहिए।

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