संतो के सानिध्य में सन्यास आश्रम के मंहत श्री रामानंद गिरिजी धूल रोट की रस्म सम्पन्न हुई

PALI SIROHI ONLINE

भरत गर्ग/किशन माली

पिण्डवाड़ा। पिण्डवाडा नगर के पुलिस थाने के समीप स्थित अति
प्राचीन सन्यास आश्रम में मंहत रामानन्द गिरी महाराज के देवलोकगमन के तीसरे दिवस सोमवार को संत परम्परानुसार आबू संत सेवा मंडल के सानिध्य में धूल रोट की रस्म कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।जानकारी के अनुसार पिण्डवाडा में स्थित प्राचीन सन्यास आश्रम के मंहत रामानंद गिरी महाराज का 102 वर्ष की आयु में देवलोकगमन के बाद भू-समाधि के तीसरे दिन सोमवार को धूल-रोट की रस्म में साधु-संतों व उनके भक्तो की आंखों से गम के आंसू छलक पड़े। समाधि स्थल पर धूल-रोट के लिए पहुंचे हर संत व श्रृदालुओं के चेहरे पर उदासी छायी हुई थी।

वही धूल रोट मे आबू संत सेवा मंडल एवं पंचायती अखाडा सहित विविध जगहो से आए साधु- संतो ने हिस्सा लिया।संत परम्परानुसार धूल रोट रस्म विधान महानिर्वाण् पंचायती अखाडे के संत एवं हनुमान मंदिर शास्वत आश्रम के मंहत श्री अरविन्दपुरी महाराज व सन्यास आश्रम के संत समाधान पुरी महाराज के सानिध्य एवं श्री आबू संत सेवा मंडल के अध्यक्ष मंहत लहर भारती, संरक्षक धर्मराज भारती गुरूशिखर आबूपर्वत, प्रेम नारायण पुरी महाराज की पावन निश्रा में दिवंगत महंत की आत्मा की शांति पाठ के द्वारा मोक्ष के लिए प्रार्थना की गई। महंत गिरि के समाधि स्थल पर धूल रोट की रस्म दिन के सुबह 12 बजे आबू संत सेवा मंडल के प्रतिनिधियों और संतो की मौजूदगी में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शंखध्वनि और गुलाब की पंखुडिय़ों की वर्षा कर धूल-रोट की पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद चावल-दाल का भोग लगाकर साधु-संतों ने महंत रामानंदगिरि की दिवंगत आत्मा के प्रति मोक्ष की कामना की। इस दौरान आश्रम परिसर में शांति पाठ भी किया गया। महंत के प्रति मोक्ष की कामना की जाती रही। इसमें श्रृदालुओ समेत सैकड़ों की तादाद में साधु-संत शामिल हुए।

धूल रोट क्या है…??

श्री सन्यास आश्रम में समाधि के बाद धूल रोट का आयोजन हुआ। धूल रोट ब्रह्मलीन होने के तीसरे दिन होता है। धूल रोट में रोटी में चीनी मिलाकर महात्माओं को दिया जाता है। चावल व दाल प्रसाद स्वरूप बांटा होता है। सभी संत व भक्तगण इसे ग्रहण कर मृतक के स्वर्ग प्राप्ति की कामना करते हैं। धूल रोट रस्म के बाद शाम से समाधि स्थल पर अखंड दीपक को जलाने के बाद से समाधि स्थल पर पूजा के साथ ही भोग लगाया जाएगा। जिस तरह से भगवान की पूजा आरती की जाती है। उसी तरह से समाधि स्थल पर भी पूजा पाठ किया जाएगा।धूल रोट में सवा किलो आंटे की बनती है एक रोटी- धूल रोट कार्यक्रम में सवा किलो आंटे की एक रोटी बनायी गई. जिसके बाद उसे घी, चीनी और मेवा के साथ मिलाकर कूटकर चूरमा बनाया गया. उसी चूरमे का महंत रामानंद्र गिरी की समाधि पर भोग लगाया गया। भोग लगाने से पहले उनकी समाधि स्थल पर विधि विधान के साथ पूजा-अर्चना करके आरती उतारी गयी। पूजा और भोग के बाद उसी चूरमे का प्रसाद सभी को दिया गया। संत-महात्माओं को भेट दक्षिणा भी प्रदान की गई।

आज से आश्रम की रसोई में बनने लगेगा कच्चा भोजन

धूल रोट कार्यक्रम के बाद से आश्रम के चूल्हे में कच्चा भोजन यानी कि दाल-चावल बनने लगेगा। क्योंकि महंत रामानंदगिरी की मौत के बाद से रसोई में कच्चा भोजन नहीं बन रहा था। धूल रोट की पूजा के बाद अब फिर से आश्रम की रसोई में दाल चावल बनेगा, जिसे यहां पहुंचने वाले संत भोजन प्रसाद ग्रहण कर सकेगे।

यह भी हुए कार्यक्रम में शरीक-

भाजपा जिला उपाध्यक्ष एवं जिला परिषद सदस्य किरण राजपुरोहित, भाजपा किसान मोर्चा प्रदेश सदस्य रतन गरासिया,नगर भाजपा मंडल अध्यक्ष महावीरयति, ग्रामीण अध्यक्ष लीलाराम प्रजापत,स्वरूपगंज मंडल अध्यक्ष हिरालाल चौधरी, महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष अन्शु वशिष्ठ, विहिप जिला मंत्री सुरेन्द्रसिंह परमार, बजरंगदल प्रखंड अध्यक्ष महेश राजगुरू, छगनभाई प्रजापत झाडौली सहित कई मौजिज लोग शरिक हुए।

इनकी रही मौजूदगी –

शेखर अग्रवाल, महेश यति, कमलेश राजगुरू,चेतन अग्रवाल, मनोहरलाल अग्रवाल पालनपुर, भुराराम माली, गोपी अग्रवाल, मनोज सोनी, मोहनलाल गुर्जर, विष्णु रावल, श्याम अग्रवाल पालनपुर, फकाराम प्रजापत, बजरंग अग्रवाल, कैलाश अग्रवाल, किस्टोसिंह,दिनेश रावल, मंजुला अग्रवाल, स्नेहलता अग्रवाल, नीरूपा दवें, पुष्पा अग्रवाल,पुष्पा बारहड, ओमप्रकाश दवें भन्दर सहित सैकडो गणमान्य मौजुद थे।