5 साल के लिंगानुपात में 1 हजार पर 61 बेटियां: स्वास्थ्य को लेकर जागरूक होने लगे हैं जिले के लोग

PALI SIROHI ONLINE

सिरोही। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 की दूसरी रिपोर्ट जारी हुई है। पहली रिपोर्ट 2015-16 में जारी हुई थी। पिछले पांच साल की इस रिपोर्ट में हमारे जिले के लिए गर्व और खुशी की बात यह है कि बेटियों के प्रति हमारी नेगेटिव सोच बदल रही है। यह वजह है कि पांच साल के लिंगानुपात में 1 हजार बेटों पर 61 बेटियां बढ़ गई। पहले 1 हजार महिलाओं पर लिंगानुपात 999 था जो अब बढ़कर 1060 हो गया। दोनों रिपोर्ट की तुलना करने पर सामने आया है कि सिरोही जिले में काफी सुधार देखने को मिल रहा है।

इससे सबसे ज्यादा शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर जिलेवासी जागरूक हुए हैं, लेकिन चिंता की बात यह है कि जिले में 5 साल तक के बच्चों में मोटापा बढ़ रहा है। पुरुष ही नहीं महिलाओं में भी शराब और तंबाकू की लत बढ़ रही है। महिलाएं और पुरुष मधुमेह रोग की चपेट में आ रहे हैं। लोगों में हापरटेंशन बढ़ रहा है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे जिले के 951 घरों, 1304 महिलाओं और 190 पुरुषों से जानकारी जुटाते हुए किया गया है।

सर्वे में यह सामने आया कि 6 साल तक की बच्चियों से लेकर महिलाओं में शिक्षा के प्रति जागरूकता आई है। जिले में 6 साल तक की बच्चियां 2015-16 में 48.3 प्रतिशत स्कूल जाती थी अब 59.4 प्रतिशत जाती है। 5 वर्ष से कम आयु के बच्चे जिनका जन्म पंजीकरण पहले 68 प्रतिशत ही था बढ़कर अब 93.7 प्रतिशत हो गया। मृत्यु पंजीकरण के प्रति भी लोग जागरूक हुए हैं। 3 वर्षों में मौतों का पंजीकरण शून्य था जो 65.8 प्रतिशत हो गया है।

फैमिली: 15 साल से अधिक उम्र में 60 फीसदी बालिका शिक्षित

जिले के परिवार बेटियों को शिक्षा देने में जागरूक हुए है। 15 से 49 साल की साक्षर महिलाओं की संख्या पांच साल पहले शून्य थी और अब 60.6 प्रतिशत महिलाएं शिक्षित है। स्कूल वर्ष 2019-20 के दौरान प्री-प्राइमरी स्कूल में भाग लेने वाले 5 वर्ष की आयु के बच्चे एक नही था जो अब 4.2 प्रतिशत बच्चे जुड़ गए। 10 या अधिक वर्षों की स्कूली शिक्षा वाली महिलाएं 14.5 थी जो अब 25.7 प्रतिशत हो गई।

सर्वे में यह सामने आया कि 2015-16 में सिर्फ 22.1 प्रतिशत लोग स्वास्थ्य बीमा से जुड़े हुए थे, अब आंकड़ा 92 प्रतिशत पहुंच चुका है। पांच साल पहले 15 से 24 साल की 42.2 प्रतिशत महिलाएं ही पीरियड के दौरान सुरक्षा के स्वच्छ तरीकों का उपयोग करती थी अब 74.2 प्रतिशत महिलाएं जागरूक है। महिला नसबंदी 29.3 प्रतिशत थी अब 43 प्रतिशत हो गई है। पहली तिमाही में 54.2 प्रतिशत माताएं प्रसव पूर्व जांच करवाती थी अब 73.1 प्रतिशत जांच करवाती है। टिटनेस का टीका भी 87.7 प्रतिशत माताएं ही लगाती थी अब 93.3 प्रतिशत लगाती है।

संस्थागत प्रसव भी 84.2 प्रतिशत से बढ़कर 95.7 प्रतिशत हो गया। पंजीकृत गर्भधारण 89.9 प्रतिशत से 99.7 प्रतिशत तक पहुंच गया है। अस्पतालों में प्रसव की सुविधाएं 56 प्रतिशत से बढ़कर 82.6 प्रतिशत हो गई। घर पर जन्म सिर्फ 1.1 प्रतिशत हो गया। 12 से 23 माह के बच्चों का टीकाकरण पहले 47.1 प्रतिशत था जो बढ़कर 86.4 प्रतिशत हो गया। 4.2 प्रतिशत लोग निजी अस्पतालों में टीकाकरण करवाते थे जो अब पूरी तरह सरकारी अस्पतालों में होने लगा है। 6 माह तक के दूध पीने वाले बच्चों की संख्या 39.6 प्रतिशत

…और चिंता : हाइपरटेंशन, तंबाकू और शराब की लत, बच्चों में बढ़ता मोटापा

इस सर्वे में जिलेवासियों के लिए चिंता की बात यह है कि हमारे बच्चों में मोटापा बढ़ रहा है। पुरुष ही नहीं महिलाएं भी तंबाकू और शराब की आदी हो रही है। पहले 5 साल तक सिर्फ 0.9 प्रतिशत बच्चों में ही मोटापा था, लेकिन अब 0.9 प्रतिशत में मोटापा बढ़ गया है। 15 साल से अधिक उम्र की महिलाओं में मधुमेह रोग पांच साल पहले नहीं था जो अब 5.1 प्रतिशत तक महिलाओं में मधुमेह है। युवकों में भी मधुमेह नहीं था अब 8.6 प्रतिशत मिला। 15 साल से अधिक उम्र की 8.7 प्रतिशत महिलाएं तंबाकू सेवन करती है इसी आयु वर्ग के पुरूष 39.9 प्रतिशत तंबाकू सेवन करते हैं ।

15 साल से अधिक उम्र की 0.3 प्रतिशत महिलाएं शराब का सेवन करती है इसी आयु वर्ग में 13.5 प्रतिशत पुरुष शराब पीते हैं। महिलाओं में 10.8 प्रतिशत और पुरुषों में 18.7 प्रतिशत हाइपरटेंशन है। 5 साल तक के बच्चों की उम्र के हिसाब से ऊंचाई पहले 42.3 प्रतिशत थी जो अब 30.7 प्रतिशत हो गई।