एक साथ आरती और अजान सुनाई देती: साम्प्रदायिक सौहार्द ऐसा कि मंदिर-मस्जिद आमने-सामने, दोनों पक्ष प्यार-मोहब्बत से रहते

PALI SIROHI ONLINE

पाली।पाली के प्यारा चौक पर साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल देखने को मिलती है। यहां एक तरफ मस्जिद हैं तो दूसरी तरफ मंदिर। दोनों के बीच की महज 12 फीट की दूरी हैं। शाम के समय एक तरफ मंदिर में आरती सुनाई देती है तो दूसरी मस्जिद में अजान। दोनों ही पक्षों का कहना हैं कि दोनों धर्मों का अपने-अपने तरीके से ऊपरवाले को याद करने का तरीका हैं। यहां साम्प्रदायिक सौहार्द है ओर आगे भी ऐसा ही रहेगा।

दरअसल, पाली के प्यारा चौक जो कि मुस्लिम मोहल्ला हैं। यहां एक तरफ जांगिड़ समाज का भगवान विश्वकर्मा का प्राचीन मंदिर हैं तो दूसरी तरफ सालों पुरानी छीपा समाज की बड़ी मस्जिद हैं। दोनों धर्मों के लोग अपने-अपने तरीके से ऊपर वाले को याद करते है। आज भी प्यारा चौक में शाम के समय अजान व आरती साथ में सुनाई देती हैं।

मोहम्मद मेहबूब ने बताया कि उनकी उम्र 60 साल की है। तब से मंदिर-मस्जिद को देखा हैं। हां समय के साथ दोनों के स्वरूप में बदलाव जरूर हुआ हैं लेकिन हमेशा ही उन्होंने पुजारी को मंदिर में पूजा करते हुए तो मस्जिद में मौलाना को अजान देते हुए देखते आ रहे हैं। सच कहे तो यह मंदिर इस मोहल्ले की जिम्मेदारी हैं। आज तक अजान व पूजा-अर्चना को लेकर दोनों पक्षों में किसी भी तरह का तनाव देखने को नहीं मिला।

लोगों का सहयोग और प्यार मिला

मुस्लिम समाज के सदर हकीम भाई व मेहबूब टी ने बताया कि कुछ ऐसा ही नजारा मस्तान बाबा क्षेत्र में देखने को मिलता हैं। यहां ईदगाह के पीछे की तरफ शिवजी का मंदिर हैं। दोनों की एक दीवार हैं। ऐसे में शाम के समय यहां भी स्थिति यह रहती हैं कि अजान की आवाज मंदिर परिसर में खड़े लोगों के कानों तक सुनाई देती हैं तो मंदिर में हो रही आरती की आवाज ईदगाह में खड़े लोगों के कानों तक पहुंचती हैं लेकिन साम्प्रदायिक सौहार्द ऐसा हैं कि आज तक दोनों पक्षों में किसी तरह की तनातनी नहीं हुई। जांगिड़ समाज के प्रकाश पिड़वा व रामचंद्र पिड़वा ने बताया कि साल में तीन-चार कार्यक्रम मंदिर में होते हैं। जिसमें समाज के लोग भाग लेते हैं। हमेशा क्षेत्रवासियों का उनको सहयोग, प्यार मिला हैं ।