गुमानसिंह ने दंडवत देकर तय किया 120 किमी का सफर: कठोर तपस्या कर जालोर सिरे मंदिर तक पहुंचा, गाजे बाजे से यात्रा हुई पूरी, जगह-जगह पुष्प वर्षा कर किया स्वागत

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रानीवाड़ा।ऐसा माना जाता है कि सनातन धर्म आस्था के बल पर टिका हुआ है। आस्था का ऐसा ही नमूना रानीवाड़ा के जाखड़ी गांव में नजर आया है। जाखड़ी निवासी गुमान सिंह सोम सिंह चौहान जो भोमिया राजपूत समाज से वास्ता रखते है। उन्होंने साधना व कठोर तपस्या का मार्ग अख्तियार किया है। आम व्यक्ति के लिए ऐसी साधना व कठोर तप नामुमकिन है। उन्होंने इस गर्मी के दौर में जालोर सिरे मंदिर तक दंडवत कर सड़क का सफर तय किया है।

बता दें कि कई सालों पहले सिरे मंदिर के पीर शांतिनाथ महाराज का जाखड़ी प्रवास था। तब गुमान सिंह किशोर थे। महाराज का आशीर्वाद ऐसा रहा कि उनके मन में वैराग्य पनपने लगा। महाराज के प्रति अगाढ़ आस्था के चलते गुमान सिंह ने एक प्रण लिया था कि वो पीठ के बल लेटकर दंडवत चलकर गुरू पीर शांतिनाथ महाराज की सिरे मंदिर तलहटी में बने मंदिर पहुंचेंगे। कठोर प्रण के आगे परिवार लाचार था। ऐसे में मुश्किल से परिवार को राजी कर 2 अप्रैल को जाखड़ी से यह सफर शुरू किया।

इसे सफर कहे या कठोर तपस्या

2 अप्रैल से शुरू हुआ यह सफर या तपस्या 6 मई को सिरे मंदिर तलहटी पर स्थित पीर शांतिनाथ जी के मंदिर पर पूरी हुई। इस 34 दिन के सफर में जाखड़ी गांव के सभी कौम के लोगों सहित परिवार व भोमिया समाज के लोगों ने उत्साहवर्धन किया। इस दरमियान बैंड बाजे, ढ़ोल थाली सहित पूरे साजो सामान के साथ काफिला आगे बढ़ता गया। काफिले का कई जगह पुष्पों की बारिश के साथ स्वागत सत्कार हुआ।

सन्यास लेने की हो रही कवायद

जाखड़ी के ग्रामीणों की बात माने तो गुमान सिंह चौहान का भाव लंबे समय से भक्ति व संसार से विरक्ति का रहा है। ऐसे में परिजनों सहित ग्रामीणों का मानना है कि जालोर जिले में एक ओर नाथ का सर्जन होता है तो कोई अतिश्योक्ति नही होगी। चौहान पर महंत पीर शांतिनाथ महाराज की गहरी छाप देखी जा रही है। इससे पूर्व बुढ़ेश्वर मठ रेवदर के महंत दिवंगत लहरभारती के शिष्य भी हर्षवाड़ा के भोमिया समाज से है।