करनवा में आयोजित सुन्दरकाण्ड पाठ में संत त्रिवेदी ने गाय के हर प्रारूप को बचाना अपना धर्म है

PALI SIROHI ONLINE

गाय के हर प्रारूप को बचाना अपना धर्म है _त्रिवेदी
हरी नाम की महत्ता को समझाया,
सुंदरकांड में लंका दहन का प्रसंग का विस्तार से हुआ वर्णन

Pali। बाली उपखण्ड के लुणावा के निकटवर्ती करनवा गांव के मोटीपोल हनुमानजी स्थापना की वर्षगाठ पर श्री सुंदरकांड हनुमान मंडली लुणावा,करनवा एव समस्त राम भक्त करनवा के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय सुंदरकांड पाठ एव संगीतमय हनुमत कथा के दूसरे दिन कथा वाचक पंडित श्री पीयूष त्रिवेदी धुंधला सोजत ने सुंदरकांड के तहत हनुमानजी और माता सीता के संवाद, भगवान राम को माता सीता की खबर देने एव लंका दहन के प्रसंग को विस्तार से समझाया, वही बताया कि वर्तमान समय में गाय के सभी प्रारूप जिसमें गाय, सांड, बैल को बचाना अपना कर्तव्य समझना है !

वही कार्यक्रम में विश्वकर्मा महापुराण के कथावाचक जयंतीभाई शास्त्री महाराज ने भी हरी भजन की महत्ता को विस्तार से समझाया और व्यास पीठ की पूजा अर्चना की। हरी नाम की चोट जिसे लग गई उसका जहर भी कुछ नही बिगाड़ सकता, हमेशा भगवंत का स्मरण और हरी नाम का स्मरण करें।
सुंदरकांड मंडल की ओर से दोनो कथावाचकों का बहुमान किया गया।

कथा स्थल ओटोबा प्लॉट सागर राजकीय स्कूल के पास करनवा लुणावा में शाम 7.30से रात्रि 11.00बजे तक आयोजित हो रहि है। इसको लेकर सुंदरकांड हनुमान मण्डली लुनावा, करनवा के रमेश सुथार काकू, हितेंद्रदत शर्मा, हितेश सुथार, नरेंद्र सुथार, भरत ओझा, कन्यालाल सुथार, भंवरलाल कुमावत, जयंतीलाल दवे, अरुण कुमार,अरविंद सुथार, बाबूलाल, बंशीलाल, कैलाश गहलोत, किकाराम सुथार, शंकरलाल, पन्नालाल कुमावत, शिवलाल, रामलाल, उम्मेद सोलंकी, गुलाब राम, भरत सोलंकी, हितेश, लालाराम सहित सैकड़ों पुरुष एव महिलाओ ने भाग लिया, मंच संचालन शंकरलाल परमार करनवा ने किया।