संकेत अच्छे हैं: शगुन को माने तो भादवे- आषाढ़ में भी अच्छी बारिश, नाले उफन सकते हैं

PALI SIROHI ONLINE

गुडा बालोतान।• आखातीज पर बिठूड़ा गांव और श्रीमाल नगर में
आखातीज पर देखे बारिश के शगुन, अन्य गांवों में भी ऐसे ही शगुन आखातीज पर विभिन्न गांवों बारिश को लेकर शगुन देखे गए।

उस आधार पर इस वर्ष भाद्रपद व आषाढ़ मास में अच्छी बारिश तो श्रावण मास में कम बारिश होने के शुभ संकेत दिखाई पड़े हैं। किसानों की माने तो इस वर्ष भाद्रपद व आषाढ़ मास के दौरान अच्छी बारिश होने से नदी नाले उफान पर चल सकते हैं। इसी के साथ किसानों के अनुसार आषाढ मास यानी जून के अंत में भी बारिश का होने का मतलब है कि बारिश इस वर्ष जल्द दस्तक दे सकती है।

गौरतलब है कि जिले के गांवों में अक्षय तृतीया का विशेष महत्त्व माना जाता है। आखातीज के दिन किसानों व ग्रामीणों की ओर से देखे जाने वाले शगुन का सीधा जुड़ाव बारिश और बारिश से होने वाली खेती बाड़ी और मानसून से होता है। वैसे गावों में हाळी अमावस्या और आखातीज के अवसर पर शगुन देखने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।

हाळी अमावस्या और आखातीज के अवसर पर विभिन्न गांवों में अलग-अलग प्रचलन के अनुसार शगुन देखने का रीति-रिवाज बना हुआ है। इस दिन देखे जाने वाले शगुन से खेती करने वाले कृषकों व किसानों को आने वाले पूरे वर्ष के मानसून और उसके फलादेश की जानकारी व अनुमान भी लग जाता है। गंगावा एवं थांवला गांव में भी आखातीज पर जमाने के संकेत देखे गए। इस मौके पर बिठूड़ा गांव में ठाकुरजी मंदिर पुजारी गोविन्ददास वैष्णव, महादेव मंदिर पुजारी ऊमगिरी, मांगगिरी, दिलगिरी भी मौजूद थे।

प्रतीक बना ऐसे देखते हैं शगुन

गांव के ठाकुरजी व महादेव मंदिर परिसर में किसानों ने तालाब की काली मिट्टी से गणपति की मूर्ति और वर्षा ऋतु के चार माह यानि आषाढ, श्रावण, भाद्रपद व आसोज मास के नाम से चार छोटे कुंड और काली मिट्टी से ही नदी बनाई गई। इष्ट देवी देवताओं का स्मरण कर उनमें पानी भरने के बाद आधे घंटे तक वैसे ही रखा गया। सर्व प्रथम भाद्रपद मास का कुंड उसके बाद आषाढ़ मास का कुंड फूटा, श्रावण मास का

कुंड सबसे बाद में फूटा नदी का पानी रिस गया। मक्खी भी देती है आने वाले वर्ष की प्रकृति के संकेत

शगुन देखने के लिए गणपति की प्रतिमा के समक्ष दो धान की ढेरी बनाकर उस पर सुकाल (सुयोग) व अकाल (कुयोग ) नाम से गुड़ की दो गोलियां रखी गईं। किसानों की मानता है कि मक्खी जिस ढ़ेरी पर पहले बैठती है, उसी से आने वाले वर्ष की खेती के संकेत दिखाई पड़ते हैं। इस बार सुकाल के नाम पर बनाई गई गोली पर पहले मक्खी बैठी जिससे 75 प्रतिशत तक अच्छी बारिश व अच्छी उपज की उम्मीद जताई जा रही है।

श्रीमाल नगर में दिखा अच्छा जमाना

स्थानीय श्रीमाल नगर में अक्षय तृतीया के उपलक्ष में शगुन देखने की परंपरा निभाई गई। हरि सिंह सोलंकी ने बताया कि भंवर सिंह सोलंकी की कोटड़ी में शगुन देखने की परंपरा निभाई। दो युवकों के हाथ के बगल में अच्छे जमाने व काल के दो संकेत चिन्ह लगाए गए। उनको आपस में टकराया इसके बाद अच्छे जमाने का चिन्ह ऊपर पहुंचा। इसी तरह 7 तरह के अनाज के सुकून भी देखे गए।