यहां आखातीज के दिन मनाते हैं मातम: डाकुओं के हमले में मारे गए थे 50-60 दूल्हा-दुल्हन, तब से नहीं बजती शहनाई

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सवाईमाधोपुर।अक्षय तृतीया के अबूझ सावे पर सबसे ज्यादा शादियां होती है। कई जोड़े शादी के बंधन में बंधते है। बैंडबाजे और शहनाई की गूंज के साथ खुशी का माहौल होता है। आज के दिन को मंगल कार्यों के लिए शुभ माना जाता है। मगर राजस्थान में एक जिला ऐसा है, जहां आज के दिन को मातम की तरह मनाया जाता है। इस दिन को लोग शोक की तरह मनाते हैं। हम बात कर रहे है, सवाईमाधोपुर के चौथ का बरवाड़ा और उसके आस-पास के 18 गांव की। कहा जाता है कि, सोहलवीं शताब्दी में अक्षय तृतीया के दिन चौथ माता मंदिर में एक बड़ा हादसा हो गया था। उस दिन को आज तक लोग बुरे दिन की तरह याद करते हैं। आखातीज पर मंदिर में भी कम लोग आते हैं। पूरा इलाके में सन्नाटा रहता है। शादी भी एक दिन पहले या एक दिन बाद होती है।

50-60 दूल्हा-दुल्हन मारे गए सेवानिवृत्त वरिष्ठ हिंदी व्याख्याता तथा इतिहासकार शरीफ अहमद ने बताया कि चौथ माता मंदिर में आखातीज पर नव-विवाहित जोड़े धोक लगाने आए थे। इस दौरान दुल्हन से छेड़छाड़ होने पर झगड़ा हो गया। मामला इतना बढ़ा कि डाकूओं ने भी हमला कर दिया। नरसंहार में 50-60 नव दंपती मारे गए थे। नव-नवेली दुल्हन और दूल्हे सदा के लिए बिछड़ गए थे। इसके बाद यहां के राजा ने चौथ का बरवाड़ा और उसके ठिकाने में आने वाले 18 गांव में अक्षय तृतीया के दिन मांगलिक कार्य नहीं करने और शोक मनाने की घोषणा कर दी थी। इसे आज तक निभाया जा रहा है।

आज भी बने हैं स्मारक घटना में मारे गए लोगों के स्मारक आज भी चौथ माता खातालाब मेला मैदान और चौथ माता पहाड़ियों के नीचे स्थित वन क्षेत्र में बने हुए हैं। यह स्मारक लोगों को उस दिन की घटना की याद दिलाते हैं।

मंदिर में घंटी की आवाज भी नहीं होती

मंदिर पुजारी शंकर लाल सैनी ने बताया कि आज के दिन मंदिर आने वाले भक्तों की भीड़ भी कम रहती हैं। शोक स्वरूप मंदिर के घंटे को भी बांध दिया जाता है। ताकि कोई उसे बजा नहीं पाए और किसी तरह का शोर न हो। आरती भी मन में बोली जाती हैं और लाउडस्पीकर का उपयोग भी नहीं होता।

घरों में नहीं बनता पकवान पूरे 18 गांव के लोग शोक में डूबे होते हैं। घरों में कढ़ाई तक नहीं चढ़ाई जाती और न पकवान बनाया जाता है। लोग खाने के लिए सब्जी तक नहीं बनाते हैं। सिर्फ इलाके में सन्नाटा होता हैं।

सालों से जारी है परंपरा अक्षय तृतीया पर आज बैंड बाजों और शादियों से उल्लास अन्य जगहों पर देखा जाएगा। वहीं चौथ का बरवाड़ा व आस-पास के 18 गांव में शादी नहीं होगी। पूरे क्षेत्र में सन्नाटा छाया रहेगा सालों बाद भी यह परंपरा जारी है। फोटो वीडियो अजीम कुरेशी