राज ठाकरे की ललकार, लाउडस्पीकर पर अजान हुई तो हनुमान चालीसा भी होगी, पवार को हिंदू शब्द से ‘एलर्जी’ है

PALI SIROHI ONLINE

महाराष्ट्र में जारी लाउडस्पीकर विवाद के बीच महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने औरंगाबाद के सांस्कृतिक मैदान में एक रैली की । शहर में लगी धारा 144 के बीच 16 शर्तों के साथ औरंगाबाद पुलिस ने इस सभा की मंजूरी दी। पुलिस ने 15 हजार लोगों की मौजूदगी की मंजूरी दी थी, रैली में 50 हजार से ज्यादा लोग पहुंचे।

करीब डेढ़ घंटे देरी से पहुंचे राज ठाकरे को देखने के लिए होटल से रैली स्थल तक हजारों की संख्या में लोग सड़कों के दोनों ओर खड़े थे। राज ने छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर रैली शुरू की। लोगों को महाराष्ट्र दिवस की शुभकामनाएं दी। इसके बाद कहा- लाउडस्पीकर पर अजान होगी तो हनुमान चालीसा भी होगी। अगर वे नहीं माने तो हनुमान चालीसा दोगुनी आवाज से चलाई जाएगी। हम शांति चाहते हैं, विवाद नहीं।

इसके बाद राज ने कहा, हमने मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने के लिए 3 मई तक के लिए अल्टीमेटम दिया था, लेकिन 3 मई को ईद है। मैं इस उत्सव को खराब करना नहीं चाहता। हम सरकार से अनुरोध करते हैं कि वह हमारी मांग पूरी करे, नहीं तो 4 मई के बाद हम किसी की नहीं सुनेंगे।

राज ठाकरे के भाषण की अहम बातें…

• लाउडस्पीकर के मुद्दे पर किसी ने पूछा, अचानक, मैंने कहा अचानक नहीं है। मैंने सिर्फ उसे पर्याय दिया है कि अगर लाउडस्पीकर नहीं हटे तो हम हनुमान चालीसा पढ़ेंगे।

• हमें महाराष्ट्र में कोई दंगा नहीं कराना, लेकिन नासिक के एक पत्रकार ने मुझे कहा कि लाउडस्पीकर पर अजान से मेरे बच्चे को परेशानी होती है। ये सामाजिक मुद्दा है, धार्मिक नहीं।

• जिस दिन मैं बोला कि शरद पवार नास्तिक हैं, उस दिन से पवार भगवान के साथ अपनी फोटो डाल रहे हैं। उनकी पुत्री ने स्वयं लोकसभा में कहा है कि मेरे पिता नास्तिक हैं। मैं नही बल्कि शरद पवार फैला रहे हैं जातिवाद का जहर।

• समाजवाद का विचार इस महाराष्ट्र से गया, राष्ट्रवाद का विचार इस महाराष्ट्र से गया और हिंदुत्व का विचार भी इसी महाराष्ट्र से गया।

• पवार को अपनी नौटंकी बंद करनी चाहिए। वे ध्रुवीकरण की राजनीति करते हैं। उन्होंने पहले कभी शिवाजी महाराज पर बोला है क्या, जो अब बोल रहे हैं।

पवार साहब समझ लो मैं जात-पात में नहीं मानता। आपको हिंदू शब्द से ‘एलर्जी’ है। जाति से ऊपर उठकर हम मराठी कब होंगे, हिन्दू कब होंगे?

जब अलाउद्दीन खिलजी यहां आया, उसके साथ कुछ हजार लोग थे, लेकिन महाराष्ट्र में गलत खबर फैलाई गई कि उसके साथ लाखों सैनिक आ रहे हैं। खिलजी के समय बलात्कार हो रहे थे, मंदिर तोड़े गए, फिर 1630 में हमारे छत्रपति का जन्म हुआ। स्वाभिमान से कैसे जीना है, ये हमारे राजा ( छत्रपति ) ने बताया।

• यहां खड़े होने की छोड़ दीजिए, बैठने की भी जगह नही है, हजारों लोग सड़क पर खड़े हैं, सभा के लिए अनुमति मिलेगी या नहीं, क्या लगा रखा है इन्होंने अनुमति मिलेगी या नहीं, क्या लगा रखा है इन्होंने ( पुलिस ने )।

• ठाणे में बैठक के बाद दिलीप धोत्रे ने फोन किया। उन्होंने हमें संभाजीनगर में सभा करने को कहा। संभाजीनगर महाराष्ट्र का केंद्र है। यह विषय संभाजीनगर तक सीमित नहीं है। मराठवाड़ा के हर जिले में होंगी बैठकें। हम यहां के बाद विदर्भ, कोंकण, पश्चिमी महाराष्ट्र भी जाएंगे। इन बैठकों में बाधा डालने से कुछ नहीं होगा।

• महाराष्ट्र में हर तरह की दिक्कत है, पानी की किल्लत है। जो समाज इतिहास भूलता है, उसके पैर के नीचे से जमीन खिसकती है। भूगोल खिसकता है।

• जैसे ही शिवाजी महाराज का निधन हुआ, औरंगजेब महाराष्ट्र में दाखिल हुआ। 27 साल महाराष्ट्र में रहा और यहीं पर उसने दम तोड़ा। औरंगजेब को पता था कि शिवाजी एक व्यक्ति नही विचार हैं और अगर ये भूमि उस विचार को अपना ले, तो मेरा बचना असंभव है।

रैली से पहले शनिवार को 100 से अधिक गाड़ियों के काफिले के साथ राज औरंगाबाद पहुंचे। पुणे से औरंगाबाद जाने के रास्ते में राज, संभाजी महाराज की स्मारक पर पहुंचे और और श्रद्धांजलि अर्पित की थी।

उद्धव का राज पर निशाना: कुछ लोग झंडा बदलने में

महाराष्ट्र दिवस पर सीएम उद्धव ठाकरे ने एक मराठी अखबार को दिए इंटरव्यू में राज ठाकरे और केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। CM ने मनसे द्वारा चलाए जा रहे लाउडस्पीकर हटाओ अभियान पर कहा- कुछ लोग हैं जो झंडे बदलते रहते हैं। पहले वे गैर-मराठी लोगों पर हमला करने की कोशिश करते हैं। अब वे गैर-हिंदुओं पर हमला कर रहे हैं। मार्केटिंग का जमाना है। ये भी नहीं चला तो कुछ और। सुप्रीम कोर्ट ने लाउडस्पीकर के संबंध में आदेश दिया। मुझे नहीं लगता कि उन्होंने किसी एक धर्म के बारे में कहा है। सभी धर्मों के लिए दिशा-निर्देश हैं।

उद्धव बोले- मेरे पिता ही थे, जो गुजरात दंगों के बाद नरेंद्र मोदी के साथ खड़े थे

उद्धव ने आगे कहा कि 2002 में गुजरात दंगों के बाद जब कोई नरेंद्र मोदी का साथ देने को तैयार नहीं था, उनके खिलाफ एक अभियान था। तब मेरे पिता बाल ठाकरे उनके साथ खड़े हुए थे और उनको मुख्यमंत्री बनाए रखने के लिए बीजेपी आलाकमान को कहा था। तब बाला साहब ने कहा था कि बिल्कुल नहीं.. मोदी गया तो गुजरात गया। उद्धव ने कहा कि मेरे आज भी नरेंद्र मोदी के साथ अच्छे संबंध हैं, लेकिन इसका मतलब किसी राजनीतिक गठजोड़ की तरह नहीं देखा जाना चाहिए।