भगवान श्री विश्वकर्मा महापुराण कथा का हुआ शुभारंभ: कन्या दान सभी दानों में श्रेष्ठ, कथा सुनने के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

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बाली।बाली के निकट श्री विश्वकर्मा मंदिर बारवा में भगवान श्री विश्वकर्मा महापुराण कथा का सात दिवसीय संगीतमय भव्य आयोजन का बुधवार से शुभारंभ किया। जिसमें कथावाचक जयंती भाई शास्त्री ने बताया कि विश्वकर्मा के ये पांच पुत्र हुए। जिनके नाम मनु, मय, त्वष्ठा, शिल्पी और देवज्ञ थे। इनकी उत्पत्ति अस्त्र-शस्त्र के निर्माण के लिए हुई। इनके पांचों एवं वंदनीय है और यज्ञ कर्म करने वाले हैं। इनके बिना कोई भी यज्ञ नहीं हो सकता। मनु ऋषि ये भगवान विश्वकर्मा के सबसे बड़े पुत्र थे। इनका विवाह अंगिरा ऋषि की कन्या कंचना के साथ हुआ था। इन्होंने मानव सृष्टि का निर्माण किया है। सुबह हुई कथा में व्यास जी ने कन्यादान की महिमा बताई उन्होंने कहा कन्या दान सभी दानों में श्रेष्ठ है।

कन्यादान का महत्व सुनकर विश्वामित्र के पांचों पुत्रों के हृदय में कन्यादान करने की इच्छा प्रकट हुए। जिस कारण भगवान विश्वकर्मा ने आदि शक्ति की आराधना कर संध्या देवी को पुत्री के रूप में प्राप्त किया और उनका विवाह सूर्य देव के साथ हुआ। जिनसे सूर्य वंश का विस्तार हुआ।

भारतीय परंपरा में निर्माण कार्य से जुड़े लोगों को ‘विश्वकर्मा की संतान’ कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार उन्हीं के प्रारूप पर स्वर्ग, देवताओं के अस्त्र-शस्त्र, पुष्पक विमान, द्वारिका, इंद्रप्रस्थ आदि का निर्माण हुआ। इस प्रकार वे बहुमुखी कलाकार और शिल्पकार हैं। कथा समापन पर विश्वकर्मा भगवान की आरती उतारी गई।

ये रहे मौजूद

इस दौरान श्री विश्वकर्मा वंश सुथार सेवा संस्थान के अध्यक्ष हरिलाल, उपाध्यक्ष कुंदनमल, सकाराम, दानाराम, खीमाराम, महामंत्री अशोक कुमार, सचिव दिनेश कुमार, कोषाध्यक्ष चंपालाल, भोजनशाला अध्यक्ष खीमराज, भोजनशाला उपाध्यक्ष घीसुलाल, अध्यक्ष निर्माण कमेटी मोहन लाल, छात्रावास अध्यक्ष पुखराज सहित संस्थान के पदाधिकारी व सदस्यगण मौजूद रहे।