बाली के सेना की पहाड़ी पर 15 दिनों से करीबन दो सौ से तीन सौ बन्दरों का काफिला फंसा हुआ

बाली के सेना की पहाड़ी पर 15 दिनों से करीबन दो सौ से तीन सौ बन्दरों का काफिला फंसा हुआ नाव की सहायता से वन्यजीव प्रेमियो ने पहुचाई राहत सामग्री

बाली। बाली के सेना की पहाड़ी पर करीबन दो सौ से तीन सौ बन्दरों का काफिला फंसा हुआ है।
समाज सेवको ने नाव की सहायता से पहुचाई बन्दरों को खादय सामग्री। बाली उपखण्ड के सेना गाव की एक पहाड़ी जो जवाई बांध के डूब क्षेत्र पानी से करीबन 10 से 15 फिट पानी से घिरी हुई है।


जवाई बांध डूब क्षेत्र में सेना की इस पहाड़ी पर देवगिरी माताजी का विशाल मन्दिर स्तिथ है जहा पिछले 15 बीस दिनों से रास्ता बन्द होने से करीबन दो तीन सौ बन्दर फंसे हुए है। मन्दिर की पहाड़ी 10 से 15 फिट ऊचाई के पानी से घिरी होने से विशाल पानी भरा होने से बन्दरो को अन्य सुरक्षित स्थान पर जाने का रास्ता नही मिल पा रहा।


भाटून्द गाव के समाज सेवक संदीप दवे, किशोर दवे,मुकेश जानी,चेतन जानी अपने साथियो के साथ सेना निवासी चम्पालाल मीणा की नाव में आलू और रोटा लेकर जलमार्ग से पहाड़ी पर पहुचे जहा उन्होंने बन्दरों को आलू रोटा खिलाये।


मन्दिर के पुजारी पोसा राम देवासी भी नाव से देवगिरी माताजी की पूजा के लिए जाते है तो बन्दरों के लिए खाद सामग्री नाव से ग्रामीणों द्वारा पहुचाई जाती है।
ग्रामीणों ने बताया की जवाई बांध का पानी किसानो को सिचाई के लिए देने के लिए जब नहर खोली जाती है तो नहर चालू होते ही 5 से 6 दिन में पहाड़ी के पास भरा पानी कम हो जाता है । उसके बाद फसे बन्दर खुले में घूम पाएगे।
सितम्बर माह के प्रथम सप्ताह से हुई बारिश से पहाड़ी पर मन्दिर के आस पास खड़े पेड़ पौधो की पत्तिया अंकुरित होने से बन्दरों को खुराक मिल रही थी जिससे इतने दिन बन्दरों को भोजन की तकलीफ नही हुई वर्तमान में बन्दरों ने पत्तिया खत्म कर देने से वन्यजीव प्रेमी बन्दरों को खाद सामग्री पंहुचा रहे है।
बाली उपखण्ड के मोरी गाव से देवगिरी माता का मन्दिर करीब 2 किलोमीटर की दुरी पर जवाई के डूब क्षेत्र में स्तिथ है ।
सलग्न विभिन्न फोटो