माता का घोड़े पर आगमन है अशुभ संकेत….डॉ. महेन्द्र भाटी “त्रिकाल”

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माता का घोड़े पर आगमन है अशुभ संकेत….डॉ. महेन्द्र भाटी “त्रिकाल”पाली (जगदीशसिंह गेहलोत)शक्ति की उपासना का पर्व चैत्र नवरात्र 13 अप्रैल से शुरू हो रहा है। इस बार कोई तिथि क्षय नहीं है। नवरात्र का पावन पर्व पूरे नौ दिनों तक मनाया जाएगा। समापन 21 अप्रैल को होगा।

नवरात्र के साथ ही हिन्दू नववर्ष की शुरुआत भी होगी। नवरात्र में मां दुर्गा की पूजा जीवन में सुख समृद्धि और शांति लाती है। कलश स्थापना, जौ बोने, दुर्गा सप्तशती का पाठ करने, हवन और कन्या पूजन से मां प्रसन्न होती हैं। चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवरात्र शुरू हो रहे हैं। चंद्रमा मेष राशि में रहेगा। अश्वनी नक्षत्र व स्वार्थसिद्ध और अमृतसिद्ध योग बन रहे हैं। अमृतसिद्धि योग में कोई कार्य शुरू करने पर शुभ फल मिलता है। साथ ही स्थायित्व की प्राप्ति होती है। वहीं स्वार्थ सिद्धि योग में जो भी कार्य किए जाते हैं वह बिना बाधा के पूर्ण होते हैं और सुख समृद्धि आती है।

माता का घोड़े पर आगमन है अशुभ संकेत….डॉ. महेन्द्र भाटी “त्रिकाल”

इस बार चैत्र नवरात्र का आरंभ मंगलवार से हो रहा है। मंगलवार के दिन मां दुर्गा का आगमन घोड़े पर होता है। जो कि शुभ नहीं है। घोड़े पर मां के आने से भय और युद्ध की स्थिति बनी रहेगी। ओर राजनेतिक फेरबदल व उग्रता रहती है । घोड़ा युद्ध का प्रतीक माना जाता है।मां दुर्गा के घोड़े की सवारी पर आना अशुभ संकेत हो सकता है धार्मिक मामलों के जानकारों व देवी भागवत पुराण की मानें तो यदि नवरात्रि पर मां घोड़े की सवारी करके आती है तो इससे प्रकृति आपदा आने का संकेत हो सकता है.पड़ोसी देशों से सीमा-विवाद व अन्य मतभेद हो सकता है.इसके अलावा आंधी-तूफान व अन्य प्राकृतिक आपदाएं भी देश को हानि पहुंचा सकती हैं. तथा नवरात्रि उपरांत वापसी में माँ की सवारी हाथी की है जो अति वृष्टि का संकेत देता है।