अच्छी खबर,चंवली पर चली खुशियों की चादर, मिलेगा भरपूर पानी,ख़ाश यह जवाई का नजारा दीखता

PALI SIROHI ONLINE

झालावाड़/रायपुर. झालावाड़ जिले की मध्यम सिंचाई परियोजना के चंवली बांध पर बुधवार को खुशियों की चादर चल गई है। सुबह ज्योति ग्रामीणों को बांध पर चादर चलने की खबर मिली तो गांव-गांव में खुशियों के ढोल बज उठे। बांध लबालब भरने से क्षेत्र में अन्नदाताओं के खेत सरसब्ज हो सकेंगे और पेयजल की किल्लत नहीं होगी। बांध के भरने का क्षेत्र के ग्रामीण बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। उधर जिला प्रशासन ने भी नीचले क्षेत्र में अलर्ट जारी कर दिया है। बांध पर सुरक्षा पहरा बिठा दिया है। बांध पर बुधवार को दस सेन्टीमीटर चादर चल रही है। जिससे यहा का दृश्य मनमोहक हो रहा है। लोग चादर चलने के बाद लुफ्त उठाने के लिए आने लगे है। बांध लबालब भरने के बाद फसलों की सिंचाई के लिए व पीने के लिए भरपूर पानी मिलेगा। बुधवार को चंवली बांध का लेवल 356.60 मीटर लेवल चल रहा है। बांध की कुल भराव क्षमता 356.50 मीटर का लेवल है।

रायपुर में 75 मीमी व चंवली बांध पर 61 मीमी बारिश मांपी गई। 2019 में बांध पर चादर चली थी, लेकिन सन 2020 में कम बारिश होने से बांध नहीं भरा था। वहीं बांध के ऑवर फ्लो होने से नदी के आसपास के सैंकड़ों गांवों का भूमिगत जलस्तर भी बढ़ेगा .चंवली बांध पर चादर चलने के बाद यहां पर बुधवार को बडी संख्या में बांध का नजारा देखने के लिए लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। यहां झालावाड़ के अलावा मध्यप्रदेश और कोटा से भी लोग बांध का खूबसूरत नजारा देखने और पिकनिक मनाने के लिए पहुंच गए। लोगों की भीड़ को देखते हुए पुलिस तैनात कर दी गई है। जो लोगों को बांध पर नहीं जाने दे रहे हैं। साथ ही बार-बार लोगों को सतर्क कर रहे हैं, ताकि कोई अनहोनी नहीं हो। गौरतलब है कि 2019 में बांध की चादर चलने के दौरान एक युवक नीचे गिर गया था। जल संसाधन विभाग के कनिष्ठ अभियन्ता रामलाल लोधा ने बताया कि बांध पर चादर चलने के बाद सुरक्षा के लिए पुलिस को अवगत करवाया गया है। थाना प्रभारी इस्लाम अली ने बताया कि चंवली बाध पर सुरक्षा व्यवस्था के लिए जाप्ता लगा दिया है। भागीरथी प्रयास झालावाड़. चंवली बांध को आहू-चंवली लिंक से जोडऩे से जिले के 34 गांवों के हजारों किसानों के भागीरथ साबित होगा। इन गांवों के किसानों की जमीन हमेशा हरी भरी नजर आएगी। कभी पेयजल व सिंचाई की परेशानी नहीं होगी। चंवली बांध में पानी पहुंचाने के लिए नदी जोड़ो योजना के तहत आहू पर बने गागरीन डेम से लिंक को जोड़ा गया। अब रबी के सीजन में किसानों की जमीन पैदावार के रुप में सोना उगलेगी, किसानों को सिंचाई के लिए दोनों नहरों से भरपूर पानी मिलेगा। पहले था डार्क जोन, अब आई हरित क्रांति रायपुर. चंवली बांध निर्माण से पहले क्षेत्र डार्क जोन था और भूजल स्तर पाताल में समा गया था। क्षेत्र के लोगों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ता था। सिंचाई के जल स्रोत सूख गए थे। इस कारण खेत पड़त रहने लग गए थे। क्षेत्र के किसान और पशुपालक पलायन करने को विवश थे, लेकिन बांध के निर्माण के बाद क्षेत्र की दशा और दिशा बदल दी है। पुरानी कहावत है कि खेत वही जिनका माथा पर पानी….चंवली बांध बनने के बाद क्षेत्र के खेतों के माथे पर पानी हो गया। यानी चंवली से सिंचाई होने लगी है। इससे क्षेत्र में कृषि उत्पादन भी बम्पर होने लगा है। इससे किसानों के खेत-खलिहान धन-धान्य से सम्पन्न होने लग गए हैं। क्षेत्र के किसानों की तकदीर बनाने वाली सिंचाई परियोजना साबित हो रही है। बैंक ऋण देने से भी पीछे हटने लग गए थे डार्क जोन होने के कारण क्षेत्र के किसानों के हालात सामान्य नहीं थे व को बैंको से ऋण नहीं मिल पाता था। बांध निर्माण से पूर्व क्षेत्र में सिंचाई के स्रोत्र कम थे ज्यादातर सिंचाई कुओं व परम्परागत जल स्रोत्रों के माध्यम से होती थी, जो अपर्याप्त था। जिससे इस क्षेत्र को डार्क जोन में घोषित किया था जिससे बैंक किसानो को ऋण नही देते थे। जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ नही थी। बांध बनने के बाद किसानो की समपन्नता बढ़ती गई व डार्क जोन का दाग हट गया है। क्षेत्र में हैप्पी इंडैक्स बढ़ गया है। अटलजी का सपना झालावाड़ में हुआ साकार पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने देश की नदियों को आपस में जोडऩे का सपना देखा था। इस दिशा में कार्य योजनाएं भी तैयार की गई थी। चम्बल, कालीसिंध, पार्वती नदी को आपस में जोडऩे की डीपीआर भी तैयार हुई थी, लेकिन वह साकार नहीं हो पाई। आहू नदी से चैनल बनाकर चंवली को आपस में जोड़ा गया। तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अटलजी के नदियों को जोडऩे के सपने को झालावाड़ में साकार कर दिया। राजे के शासन काल में चैनल बनाकर आहू नदी का पानी चंवली में डालने की योजना बनाई है। योजना मूर्तरूप ले ली है और चांवली बांध पर खुशियों की चादर चल पड़ी है।